कवि निर्मल के 90 वें जन्म दिवस पर हुआ पुस्तक विमोचन,कवि सम्मेलन और अभिनंदन समारोह

कवि निर्मल के 90 वें जन्म दिवस पर हुआ पुस्तक विमोचन,कवि सम्मेलन और अभिनंदन समारोह

सागर।
मुहब्बत की नहीं जाती हो जाती है।
घनानंद ने कहा है कि मुहब्बत का रास्ता बहुत ही सीधा है। इसमें और कविता में होशियारी नहीं चलती। यानी कविता दिल की चीज है, दिमाग की नहीं। निर्मल जी स्वभाव से कवि हैं इसलिए उनकी कविता निरंतर है। 90 वर्ष की आयु में भी ” गीत तुम्हारे स्वर मेरा है ” का शीर्षक उनकी इस रवानगी को प्रमाणित करता है।यह बात शनिवार को ख्यातनाम कवि निर्मल चंद निर्मल के 90 वे जन्म दिवस और उनकी 22 वीं काव्य – कृति” गीत तुम्हारे स्वर मेरा है ” के सिविल लाइंस स्थित वरदान परिसर में आयोजित भव्य विमोचन समारोह के अवसर पर सारस्वत वक्ता प्रो.सुरेश आचार्य ने कही।
विशिष्ट अतिथि प्रो.आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने समीक्षात्मक वक्तव्य में कहा कि काव्य संग्रह की कविताएं वर्तमान हिंदी साहित्य की श्रेष्ठतम कविताएं हैं जो भविष्य में हिंदी साहित्य के दिशाक्रम को ऊंचाई देने में सक्षम सिद्ध होंगी।उन्होंने निर्मल जी आम आदमी के कवि बताया।विशिष्ट अतिथि डॉक्टर जीवनलाल जैन
ने निर्मल को कविता और साहित्य में रुचि जगाने वाला प्रेरक रचनाकार बताते हुए उनसे अपने पारिवारिक संबंधों को उल्लेखित किया।
कार्यक्रम के केंद्रीय व्यक्तित्व कवि निर्मल चंद निर्मल ने अपने उद्बोधन में अपनी प्रतिनिधि कविता ” उठाओ कुदाली चलो मेरे साथ,पहाड़ों से चल कर करें दो दो बात ” का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पण को सर्वोच्च बताया।अपनी बाईस किताबों को राष्ट्रभक्ति और आध्यात्म को समर्पित कहा।उन्होंने उपस्थित लोगों से अपना अनुराग व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती पूजन के बाद बाल सरस्वती ऐश्वर्या दुबे ने मधुर सरस्वती वंदना की।” श्यामलम” अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने स्वागत उद्बोधन दिया।इस अवसर पर निर्मल जी के नए काव्य संग्रह गीत तुम्हारे स्वर मेरा है का अतिथियों ने विमोचन तथा लोकार्पण किया।लेखक निर्मल का काव्यात्मक और जीवन परिचय रमा कान्त मिश्र ने दिया तथा प्रसिद्ध बुंदेली गायक शिवरतन यादव ने पुस्तक की दो कविताओं का अत्यधिक मधुर गायन कर प्रभाव छोड़ा।इस अवसर पर नगर की समस्त साहित्यिक,सांस्कृतिक,सामाजिक संस्थाओं ने निर्मल जी को उनके जन्म दिन और पुस्तक विमोचन पर शाल, श्रीफल पुष्पहार आदि भेंट कर सम्मान किया। कवि प्रभात कटारे ने श्यामलम के अभिनंदन पत्र का स्वरचित कविता का बहुत सुंदर गायन किया
साहित्यकार डा.महेश तिवारी ने सुव्यवस्थित व सुचारू संचालन किया।
कवि श्रीराम सिरदर्द द्वारा संचालित काव्य गोष्ठी में शिखरचंद शिखर,निरंजना जैन,डा.वर्षा सिंह, आर के तिवारी ने काव्य पाठ किया।आभार प्रदर्शन डा.नलिन जैन ने किया।
समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर,नगर विधायक शैलेंद्र जैन, शिवशंकर केशरी,शुकदेव प्रसाद तिवारी,के के सिलाकारी अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में प्रबुद्ध वर्ग की उपस्थिति उल्लेखनीय रही जिनमें पूर्व विधायक सुनील जैन,भोलेश्वर तिवारी,मणिकांत चौबे,हरगोविंद विश्व,डा.गजा धर सागर,डा.श्याम मनोहर सिरोठिया,टी आर त्रिपाठी,मुन्ना शुक्ला,ऋषभ समैया जलज, नवनीत जैन,पी.आर. मलैया,डा.अशोक कुमार तिवारी,आशीष ज्योतिषी,राघवेन्द्र नायक, हरिसिंह ठाकुर,पूरन सिंह राजपूत, असरार अहमद,रविंद्र दुबे कक्का,राजेंद्र दुबे कलाकार, डा.चंचला दवे, डा.लक्ष्मी पाण्डेय,डा.शरद सिंह,किरण प्रभा मिश्र,डा.कविता शुक्ला, सुनीला सराफ,डा.सुजाता मिश्र,नम्रता फुसकेले,संतोष श्रीवास्तव विद्यार्थी,श्याम पांडेय,माधव चंद्रा,भोलेश्वर तिवारी, डा.अनिल जैन, गोविंद सरवैया,डा.आर के गर्ग,डा.मनीष झा, डा.आनंद सिघंई,डा.अरुण सराफ,हरी शुक्ला, कपिल बैसाखिया,कुंदन पाराशर, अंबिका यादव,डा.रिषभ भारद्वाज,डा. शशि कुमार सिंह,रमेश दुबे, मुकेश तिवारी,एम के खरे,पुष्पेंद्र दुबे, डा संतोष मिश्रा,डा विनोद तिवारी,एम.शरीफ,जी.एल.छत्रसाल,जे.एल. प्रभाकर,अलबेला तिवारी,पुष्प दंत हितकर, डा.सतीश पांडेय,वृंदावन राय,मुकेश निराला, कपिल चौबे,राघव रामकरण,अभिषेक जैन, आनंद सोधिया,देवीसिंह राजपूत,राधाकृष्ण व्यास, राजेन्द्र दुबे कलाकार,पेट्रीस फुसकेले,
बिहारी सागर,मधुवन ग्रीन कालोनी से डा आर के जैन,डा एस एन सोनी,डी के जैन,पंकज शुक्ला,विनय जैन जबलपुर, कौरव जी,ए के जैन मंडला, नसरूल्लागंज से छोटे लाल साहू, रामविलास साहू,फूलचंद साहू,राजीव गोलन्दाज,जयंत विश्वकर्मा आदि ने उपस्थित दी।

डॉ चंचला दवे सागर

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