काव्य भाषा : बुजुर्गों का दूसरा नाम है पीपल- चरनजीत सिंह कुकरेजा भोपाल

बुजुर्गों का दूसरा नाम है पीपल
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जिस *पीपल* को
हम आस्था और विश्वास का
प्रतीक बताते हैं…
जिसकी स्तुति करते
हम नही अघाते हैं…।

जिस *पीपल* के नीचे बैठ कर
सिद्धार्थ ने की थी साधना
और बन गए थे वह गौतम बुद्ध…।

माताएं बहने बाँधती है
आज भी
जिस *पीपल* पर मन्नतों के कलेवे
करती हैं परिक्रमा श्रद्धा से
जलाती हैं दीया
करती हैं उसकी पूजा अर्चना..।

जो *पीपल* देता है हर पल हमें प्राणवायु
करता है पर्यावरण को शुद्ध।

लगती हैं
जिस *पीपल* की घनी छाँव तले चौपालें
लिए जाते हैं गाँव के विकास के लिये
छोटे बड़े फैसले…
निपटाए जाते हैं जिसके साये में
घर बाहर के आपसी भाईचारे के द्वंद…।

जिस *पीपल* को माना जाता है सबसे पवित्र
जिसकी जड़ों से लेकर शीश तक में
होते हैं औषधीय गुण…।

जिस *पीपल* की टहनियों पर
करते हैं पंछी बसेरा
जो देता है
हर थके हुए पथिक को
शीतल छाँव…।

जिसे बताते हैं
हम गाँव की शान..
जिसकी पनाह में जा कर
हम महसूसते हैं
अपने गुजरे बुजुर्गों की खुशबुएँ…
आत्मसात होते हैं उनके दिए संस्कारों की अनुभूतियों से..।

जो *पीपल*
हर मायने में रहता है हमारा हितैषी..
हमारा सच्चा हमदर्द
जो देता है साँस दर साँस हमें शुद्धता…
तो ऐसा प्राणदायी *पीपल*
वास्तु दोष के हिसाब से
कैसे बन सकता
हमारे या हमारे वंश के लिये
अहित का कारण…?

क्यों घर पर पड़ती इसकी छाया से
परहेज करते हैं हम ?
यही प्रश्न उठते थे मन में बहुत पहले..
जिनके उत्तर मिल गए हैं मुझको
बुढ़ापे की दहलीज छूते ही..।
जहाँ पहुँच कर जान लिया है मैंने
कि,देने का सुख क्या होता है
बुजुर्गों का दूसरा नाम
*पीपल* ही तो होता है।

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चरनजीत सिंह कुकरेजा
भोपाल

5 COMMENTS

  1. बेहद खूबसूरत,जीवन और समाज के विभिन्न आयाम समेटे सारगर्भित कविता।लेखक को बहुत बधाई।

  2. हार्दिक आभार मधुलिका जी प्रेरक प्रतिक्रिया के लिए

  3. बहुत सुंदर कुकरेजा जी। धन्यवाद व बधाई।

    • प्रेरक प्रतिक्रिया ही लेखन का संबल बन जाती है।सत्येंद्र जी और जनाब एजाज अंसारी जी हमेशा ही होंसला अफ़जाई करते हैं।उनका दिल से शुक्रिया

  4. अपनों पर सर्वस्व न्योछावर करके जीवन की इस अवस्था में उपेक्षा का घूँट पीने को मजबूर बुजुर्गों की मन की पीड़ा को आपने बहुत ही सटीकता और सारगर्भित तरीके से रेखांकित किया है।
    हमारे बुजुर्गों के मन की पीड़ा को बयां करती हुई बहुत ही मार्मिक और हृदयस्पर्शी तथा एक संदेशपरक रचना है।
    👏👏👏🌹🌹🌹👏👏👏

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