काव्य भाषा : बाबा रविदास – सीमान्चल त्रिपाठी सूरजपुर

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बाबा रविदास

हे लोक हितकारी,
करूणा के सागर।
भरते रहिए दीन,
दुखियों की गागर।।

हर्षित वृष्टि करते रहिए,
हे अलौकिक दृष्टा संत।
दया की तुम प्रति मूर्ति,
करिए महिमा अनंत।

करते थे वे सदा सर्वदा,
लाल कर्म से कमाल।
कर्त्तव्यनिष्ठा से पूरित,
भारत भूमि हुई निहाल।।

आपने देकर जन संदेश,
कठोती गंगा तो मन चंगा।
बहाए अद्वितीय प्रेम धारा,
बने निराली निर्मल गंगा।।

भक्ति भाव से तेरे चरणों,
शीश झुकाते नित्य हम।
देंगे बाबा रविदास हमें,
हर काम करने का दम।।

परित्याक्त कर अहम् का,
करते श्रद्धासुमन अर्पित।
लें बाबा का हम आशीर्वाद,
झूम उठते होकर गर्वित।।

सीमान्चल त्रिपाठी
सूरजपुर

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