काव्य भाषा : व्यक्ति नहीं,व्यक्तित्व का सम्मान होता है – एस के कपूर”श्री हंस” बरेली

19

व्यक्ति नहीं,व्यक्तित्व का सम्मान होता है

परवरदिगार से डर कर रहो
उसकी दी जिन्दगानी है।
अहंकार और क्रोध क्यों कि
खत्म हो जानी कहानी है।।
हमारी सोचऔर कर्म लिखते
रहते भाग्य सदा हम सबका।
यही इक छोटी सी बात बस
सबकी समझ में आनी है।

व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व का ही
बस सम्मान होता है।
हम सब मुसाफिर बस यही
सबसे बड़ा ज्ञान होता है।।
उलझनों को पहेली नहीं
हमें सहेली बनाना चाहिये।
मनुष्य ना जाने क्यों अपने
उद्देश्य से अनजान होता है।।

जियो और जीने दो यह भी
जैसे एक परोपकार है।
प्रेम पाइये और प्रेम दीजिए
यही सबसे बड़ा उपकार है।।
बड़ों का साया और आशीर्वाद
रहे सदा शीश पर हम सब के।
मन मुख पर बोल मीठे सबके
लिए बड़ा सबसे सरोकार है।।

जल से सीखिये आप निर्मल
और शीतल सा बहना।
पत्थर से सीखिये अविचिलित
हर चोट का सहना।।
शांत चित्त और निर्भीक बने
मूल स्वाभाव आपका।
करें हर काम नाप तोल कर
सुनना हो और हो या कहना।।

एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली
मोब।। 9897071046
8218685464

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here