काव्य भाषा : असर नहीं होता – आर एस माथुर इंदौर

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असर नहीं होता

दर्द में कुछ कसर नहीं होता
फिर भी मुझ पर असर नहीं होता

शाम तब्दील हुई रातों में
उसके बिन दोपहर नहीं होता

न ही रोए न मुस्कुराए ही
ऐसा कोई बशर नहीं होता

पानी की मुन्तजिर है हर नदिया
इसके बिन तो लहर नहीं होता

रात को देख कर कभी लागा
क्या किसी दिन सहर नहीं होता

आर एस माथुर
इंदौर

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