काव्य भाषा : मुलाक़ात तो होगी – कुन्ना चौधरी जयपुर

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मुलाकात तो होगी

लकीरों में अगर हो तो बात तो होगी ,
आज नहीं तो कल मुलाक़ात तो होगी !
दूर है नज़रों से मगर अनजान तो नहीं ,
रिश्ते की इक नई शुरुआत तो होगी ..!!

तस्वीरों में देखा फिर भी अपने से लगते हैं ,
रूबरू होंगे जब वो जश्न ए रात तो होगी …!
तन्हा तय किया बरसों जीवन का सफ़र ,
इंतज़ार था जिनका उनसे मुलाक़ात तो होगी !!

साथ चलेंगे सारी उम्र अब हमसफ़र बन कर ,
मधुर मिलन की मन में सरसराहट तो होगी!
कदम न रूकें अब देखो मंज़िल दूर नहीं ,
देर ही से सही कभी ज़िन्दगी अबाद तो होगी !!

कुन्ना चौधरी
जयपुर

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