काव्य भाषा : नज़्म – अदिति टंडन ,आगरा .

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0 नज़्म

कसक भरी राह पर
चलते – चलते अब
ठहरी है जिंदगी सुकुं से
तेरे दामन के साए में .

हर मोड़ पर बहुत
आजमाया दुनियां ने
राहत की जुस्तजू अब
खत्म हुई तेरी पनाह में .

झूठ का नक़ाब लिए
बहुत मिले हमें पर
नूर – ए – खुदा अब
मिला तेरी निगाहों में ।
अदिति टंडन
आगरा .

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