बसंत पंचमी के अवसर पर निराला स्मृति काव्य गोष्ठी संपन्न

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बसंत पंचमी के अवसर पर निराला स्मृति काव्य गोष्ठी संपन्न

इटारसी ।
लोक सृजन एवं नाविक काव्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में कवि विकास उपाध्याय के निवास गांधीनगर इटारसी में बसंत पंचमी के अवसर पर निराला स्मृति काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रख्यात साहित्यकार श्री सनत मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बुरहानपुर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री किशोर तिवारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम समस्त अतिथियों एवं कवियों ने माँ सरस्वती का पूजन अर्चन किया। तत्पश्चात गोष्ठी संयोजक विकास उपाध्याय वरिष्ठ गीतकार श्री रामकिशोर नाविक ने अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन देते हुए विकास उपाध्याय ने माँ सरस्वती के प्राकट्य प्रसंग सुनाए।
तत्पश्चात श्री किशोर तिवारी के द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना गायन से काव्य गोष्ठी की महफिल जमी,जो देर शाम तक चली।
काव्य गोष्ठी का आगाज करते हुए श्री सतीश पाराशर ने राजनीति में चुनावी परिदृष्य पर व्यंग्य करते हुए ‐ “मेरे साथ नित नए वाकये होते जा रहे हैं,क्या मुझे दिन में भी सपने आ रहे हैं ” सुनाया।
कविता के नवीन हस्ताक्षर श्री विनय चौरे ने ‐ “दिल के घाव दिखते नहीं , पर कितने भी छुपाओ छुपते नहीं । ” सुनाकर वाहवाही लूटी।
श्री बृजमोहन सोलंकी ने ‐ घटते जंगलों पर आक्रोश व्यक्त करती कविता ‐ ” सतपुड़ा के कटे जंगल , अधजले जंगल ” सुनाई।
श्री विनोद दुबे बिन्दु ने ” आया बसंत मनभावन ” बसंत गीत सुनाया।
श्री आलोक शुक्ला अनूप ने भी बसंत गीत सुनाते हुए ‐ ” सदा प्रारंभ रहूँ , अंत नहीं होना मुझे । सिर्फ़आता है , सुहाना बसंत मुझे ” सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्री विकास उपाध्याय ने प्रकृति चिन्तन प्रस्तुत करते हुए ‐ ” नदी क्या कह रही है , सुनने की ज़रूरत है ” रचना की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
श्रीमती ममता बाजपेयी ने ‐ ” तल्ख हालात से वास्ता हो गया , होश जो था मेरा वो साप्ताहिक हो गया ” शानदार गजल पेश की।
वरिष्ठ गीतकार श्री रामकिशोर नाविक ने ‐ ” अक्षरों का रथ दिया नत हूँ , भावना का पथ दिया नत हूँ ” प्रस्तुत कर माँ सरस्वती को काव्याॅजलि अर्पित की ।
मुख्य अतिथि श्री किशोर तिवारी ने ‐ ” मौसम फिर शहर में चुनावों का आ गया , याने भाई को भाई से लड़ाने आ गया ” सुनाकर तालियां बटोरी।
गोष्ठी में द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि प्रो श्रीराम निवारिया ने ‐ ” पशुओं की पीड़ा को व्यक्त करते हुए रचना सुनाई कि ‐ ” मूक प्राणियों को न्याय देने / बन नहीं पाया ईश्वर अभी / आदमियों के भगवान से ही चला रहे हैं काम / कह सकते हैं ‐ आदमियों पर देख अत्याचार ”
अध्यात्म पर केंद्रित कविता पाठ ‐ ” जीना कैसे जीना सिखलाती है गीता , मरना कैसे मरना सिखलाती है गीता ” का गायन करते हुए साहित्यकार श्री चंद्रकांत अग्रवाल ने उपस्थित जन समूह को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार श्री सनत मिश्रा ने स्वरचित कविता संग्रह में से ‐ ” अभी तो यह भी नहीं तय कि जाना कहाँ है। अभी तो यह भी नहीं तय कि सुनाना क्या है। “सुनाकर सभी को कविता पर चिन्तन हेतु एक अध्याय दे दिया। आपने कविता की दशा और दिशा पर चिंतनशील विचार विमर्श भी किया।
नाविक काव्य परिषद के संस्थापक श्री रामकिशोर नाविक ने कविता के प्रति रूझान बढ़ाने के लिये हर महीने काव्य गोष्ठी का आयोजन करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
काव्य गोष्ठी का संचालन श्री आलोक शुक्ला अनूप ने और आभार प्रदर्शन विकास उपाध्याय ने किया ।

1 COMMENT

  1. मुझे पढ़कर इतना अच्छा लग रहा है आप लोगों ने कविताएं सुने आपको कितना मजा आया होगा

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