काव्य भाषा : ‘माँ शारदे’ – राहुल विश्वनाथ ‘विश्व’

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‘माँ शारदे’

जय-जय-जय माँ शारदे,करो सकल कल्याण।
शब्द – शब्द गाथा बने , भर दो उनमें प्राण।।

मैं बालक नादान हूँ , सरगम से अनजान ।
करो कृपा माँ शारदे , गाऊँ तेरा गान ।।

श्वेत कमल माँ भारती , बारम्बार प्रणाम ।
बस तेरा गुणगान ही , करता आठों याम ।।

हंसवाहिनी ज्ञान की , बरसा दो रसधार ।
नाम रहे संसार में , जाऊँ जब उस पार ।।

आसन माँ का श्वेत है , कर वीणा का वास ।
दूर करो माँ शारदा , मानवता का त्रास ।।

वीणा की झंकार से , गूँजे मेरे गीत ।
सकल विश्व कल्याण में,बिखरे अनुपम प्रीत ।।

जगती माँ हे भारती , अंतिम यह अरदास ।
जगत में आये एकता , पूर्ण करो सब आस ।।

राहुल विश्वनाथ ‘विश्व’
गोला गोकरननाथ खीरी उत्तर प्रदेश

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