काव्य भाषा : नज़्म – अदिति टंडन ,आगरा ( उ प्र )

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ये हिज्र के लम्हे
ये तकलीफ़
बंदिशें कम होती नहीं
और
हसरतें सिमटती नहीं

ये इज़्तिराब के पल
ये कसक
सुकुं की बरखा होती नहीं
और
बेकरारी चैन पाती नहीं

ये फासलों का रंज
ये दूरी
ज़िन्दगी कटती नहीं
और
सांसें रुकती नहीं ।

अदिति टंडन
आगरा ( उ प्र )

हिज्र _ विरह

इज़्तिराब _ बैचेनी

रंज _ दुःख

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