विविध : भ्रष्टाचार – राहुल कुमार चौधरी, कुरुक्षेत्र, हरियाणा

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भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार से आशय भ्रष्ट व्यवहार, अनैतिकता, कर्तव्य उपेक्षा और निजी हित के लिए सुव्यवस्थित नियम व कानून का उल्लंघन करते हुए, पद एवं सत्ता का दुरुपयोग करना है। भ्रष्टाचार का सरलतम अभिप्राय किसी सरकारी या गैर सरकारी कर्मचारी या अधिकारी, जनप्रतिनिधि और लोक सेवक द्वारा अपनी सार्वजनिक शक्ति का दुरुपयोग व कानून का उल्लंघन करते हुए किसी प्रकार का आर्थिक या अन्य लाभ उठाना ही भ्रष्टाचार कहलाता है। भारत में भ्रष्टाचार समाज के हर क्षेत्र और हर विभाग को प्रभावित कर रहा है, कोई भी मंत्रालय या विभाग इससे अछूता नहीं है। यह भी कटु सत्य है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ है, लेकिन भ्रष्टाचारी के नहीं। कभी विश्व गुरु और सोनेे की चिड़िया कहे जाने वाले भारत देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। भारत विश्व के सबसे अधिक 180 भ्रष्ट देशों की सूची में 80वें स्थान पर है। पुलिस विभाग, निचली अदालते, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण, चिकित्सा विभाग सबसे अधिक भ्रष्ट विभाग की सूची में शामिल हैं।
कौटिल्य के अनुसार जिस प्रकार जीभ पर रखे शहद का स्वाद न लेना असंभव है, ठीक उसी प्रकार किसी शासकीय जनप्रतिनिधि और लोक सेवक का राजस्व के अंश का भक्षण न करना भी असंभव है।

भारतीय भ्रष्टाचार जांच एजेंसी व संस्थान

1. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
2. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
3. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG)
4. गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO)
5. लोकपाल (Lokpal)
6. लोकायुक्त (Lokayukat)

भ्रष्टाचार अधिनियम के अंतर्गत दोष साबित होने पर सजा व जुर्माना

√लोक सेवक के दोषी पाए जाने पर जुर्माने के साथ 6 महीने से 5 साल तक का कारावास हो सकता है।
√लोक सेवक द्वारा, भ्रष्ट या गैरकानूनी तरीकों से अनैतिक रुप से किया गया लेनदेन के लिए 3 साल से 7 साल तक कैद और जुर्माना का प्रावधान है।
√लोक सेवक द्वारा हस्तांतरित कार्यवाही या व्यवसाय में संबंधित व्यक्ति से विचार किए बिना लोक सेवक द्वारा मूल्यवान वस्तु प्राप्त करने पर कारावास की सजा के साथ दंड का प्रावधान है जो छह महीने से लेकर पांच साल तक बढ़ सकता है और जुर्माना के लिए भी उत्तरदायी होगा।
√कोई भी लोक सेवक, जो आपराधिक दुराचार करता है, उसे जुर्माने के साथ एक वर्ष से 7 वर्ष तक अवधि का कारावास हो सकता है।

भ्रष्टाचार के प्रचलित प्रकार

1 सरकारी धन, भंडार और संपत्ति का दुरुपयोग
2 ठेकेदारों या फर्मों से कमीशन वसूलना
3 झूठे दौरे, भत्ते, किराया आदि की एवज में धनराशी अर्जित करना।
4 भर्ती, नियुक्ति, स्थानांतरण एवं पदोन्नति के संबंध में गैरकानूनी रूप से धन वसूलना।
5 सरकारी कर्मचारियों को व्यक्तिगत कार्यों में प्रयोग करना
6 रेल या हवाई यात्रा की सीटे अपने अधिकृत कोटे से रिजर्व करके कमीशन पर बेचना
7 सरकारी कार्यालयों के बाबू द्वारा महत्वपूर्ण फाईलों को अग्रसित करने के लिए पैसा लेना।
8. आयात व निर्यात लाइसेंस देने में रिश्वत लेना
9 त्योहार पर अनाधिकृत रुप में उपहार ग्रहण करना
10 आर्थिक लाभ लेने और देने की आड़ में कर अधिकारी द्वारा करदाता को परेशान करके लाभ लेना
11 सरकारी आवासों पर अनाधिकृत कब्जा करके उन्हें किराए पर देना
12 रेल, बस टिकट व फीस काउंटर पर खुले पैसे न होने का बहाना बताकर निर्धारित रकम से अधिक राशि लेना।
13 बैंक अधिकारी द्वारा ऋण पास करने की एवज में कमीशन लेना
14 पुलिस द्वारा पीड़ित और दोषी दोनों पक्षों को डरा धमकाकर पैसा ऐंठना।

भारत में भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण

1 सख्त और त्वरित सजा का अभाव
2 जनता में जागरुकता का अभाव
3 स्वतंत्र जाँच एजेंसियों में अधिकारियों की कमी
4 बेरोजगारी, गरीबी और अधिक जनसंख्या
5 राजनीतिक दलों और उद्योगपतियों के बीच सांठगांठ
6 कड़े व सख्त कानून की अपेक्षा लचीला कानून
7 लोक सेवकों का अधिक लोभी हो जाना
8 लोक सेवकों के परिवारों द्वारा उन पर अधिक धन अर्जित करने के लिए दबाव बनाना
9 अकुशलता, अशिक्षा और निम्न शिक्षा स्तर
10 कर्मचारियों की कमी
11 मीडिया द्वारा भ्रष्टाचार केसो को उजागर करने के बजाय छिपाना।

भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सुझाव

1 भ्रष्टाचार संबंधित केसो में अधिक, त्वरित और कड़ी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए।
2 प्राइवेट सैक्टर में हो रहे भ्रष्टाचार को भी भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत लाया जाए।
3 भ्रष्टाचार अधिनियम में संशोधन करके किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच की परमिशन को संक्षिप्त किया जाना चाहिए।
4 विशेष अदालतो की संख्या में वृद्धि के साथ ही केस निपटान में तीव्रता लाना।
5 विभिन्न जाँच एजेंसी के आपसी मतभेद को दूर किया जाए।
6 अभियोजन गवाहों की पहचान गोपनीय रखते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
7 भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत कब, कैसे और कहाँ कर सकते हैं, इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।
8 भ्रष्टाचार जाँच एजेंसी में प्रतिनियुक्ति के बजाय सीधी और दीर्घकालीन नियुक्तियां होनी चाहिए।
9 लोक सेवको की पारदर्शिता के साथ अधिक से अधिक जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
10 सभी सांसदो, विधायकों, मंत्रियो व सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा अपनी चल अचल संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए।
11 लोकपाल और लोकायुक्त के पास आई शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निवारण होना चाहिए।
12 सरकारी संस्थानों में दाखिले और सरकारी नियुक्ति मैरिट और पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए।
13 सभी भ्रष्टाचार जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव और लालच के स्वतंत्र रुप से अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
14 टोल फ्री नंबर जारी किए जाने चाहिए। ताकि भ्रष्टाचार की शिकायत अतिशीघ्र उच्च अधिकारियों तक पहुंच सके और उचित कार्यवाही हो सके।
15 ऑनलाइन लेनदेन की अधिक संख्या और हर लेनदेन के लिए बिल प्रदान करें।
16 ब्लैकलिस्ट भ्रष्ट व्यवसायी और कर्मचारी व अधिकारी की सूची सार्वजनिक होनी चाहिए।
17 बेरोजगारी, गरीबी और महंगाई पर नियंत्रण ।।

राहुल कुमार चौधरी
भारतीय रेलवे
कुरूक्षेत्र, हरियाणा।
ईमेल Rhlkumar456@gmail.com

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