काव्य भाषा : गणतंत्र दिवस – डॉ.अवधेश तिवारी “भावुक” दिल्ली

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गणतन्त्र दिवस(26 जनवरी)

गणतन्त्र दिवस का महापर्व
नव हँसी-खुशी लेकर आया,
वसुधा ने परिधान बसन्ती
भारत माँ को पहनाया,

26 जनवरी के स्वागत में
पिकी – पपीहा गाते हैं,
रंग – बिरंगे फूलों से सज
ऋतु राज मुस्काते हैं,

वसुन्धरा ने धानी साड़ी
पहना माँ का रूप सजाया,
गणतन्त्र दिवस का महापर्व
नव हँसी-खुशी लेकर आया।

जन-गण-मन सत्कर्मों से अब
प्रजातन्त्र की शान बढ़ाएं,
भारत वर्ष के युवा वर्ग सब
लोकतन्त्र की आन बढ़ाएं,

सम्प्रभु राष्ट्र की रक्षा में रत
वीरों ने बहु रक्त बहाया,
गणतन्त्र दिवस का महापर्व
नव हँसी-खुशी लेकर आया।

एक – अखण्ड रहे भारत
तिल भर आँच न आने पाए,
देश प्रेम जन-जन में जगाकर
राष्ट्र पताका फहराएं,

“भावुक” भारत भाल जगत में
गणतन्त्र ने चमकाया,
वसुधा ने परिधान बसन्ती
भारत माँ को पहनाया।

गणतन्त्र दिवस का महापर्व
नव हँसी-खुशी लेकर आया।

डॉ.अवधेश तिवारी “भावुक”
दिल्ली

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