काव्य भाषा : हम लेंगे दो टीके – डॉ राजीव पाण्डेय गाजियाबाद

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हम लेंगे दो टीके

नहीं हारकर हम बैठेंगे,
दिखलाएंगे जीके।
जितनी चादर फ़टी हमारी,
मानेंगे हम सींके।
हम लेंगे दो टीके।। हम लेंगे दो टीके।।

तमसनिशा के बाद स्वयं ही
प्रमुदित कल होता है।
संघर्षों से जूझ मरे तो,
निश्चित हल होता है।
झंझावातों से लड़ने में ,
सीखे बहुत सलीके।
हम लेंगे दो टीके।। हम लेंगे दो टीके।।

व्यवधानों की चट्टानों को,
संयम ने तोड़ा है।
प्रतिकूल परिस्थिति का फिर से,
देखो मुख मोड़ा है।
विकट परीक्षा पास कर गए,
नम्बर लाये नीके।
हम लेंगे दो टीके।। हम लेंगे दो टीके।।

मानवता है धर्म हमारा,
रखते कभी न कर्जा।
इसीलिए हम पाते आये,
विश्व गुरू का दर्जा।
अखिल विश्व जीने के सीखें,
हमसे आज तरीके ।
हम लेंगे दो टीके।।हम लेंगे दो टीके।।

महाशक्ति के दम्भी कपटी,
मेधा सम्मुख हारे।
विध्वंस काल के हम ही केवल,
हैं सच्चे रखबारे।
दुनिया के चेहरे के रंग ,
देख सफलता फीके।
हम लेंगे दो टीके।। हम लेंगे दो टीके।।

डॉ राजीव पाण्डेय
गाजियाबाद

9990650570

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