काव्य भाषा : माँ पिता की सेवा -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

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माँ पिता की सेवा

कैसे मिलावट हो गई
माँ ,बाप के संस्कार में
बेटे दीवाने केवल हैं
गर्ल फ्रेंड के प्यार में

भावना,ममता,अश्रु की
ना करते परवाह
वृद्ध माँ बाप को
दिखाते आश्रम की राह

ना भूलें संतान यह
एक दिन होंगे वे भी वृद्ध
असमर्थ करेगी उम्र उन्हें
हों चाहे कितने समृद्ध

भारत के संस्कार रखें याद
माँ, पिता की सेवा का चखें फल
जीवन कर लें हर्षित व सफल
ब्रज,आपके बच्चे भी चखेंगे फल

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

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