समीक्षा : समस्या से संवाद करती है सत्येंद्र सिंह की कविताएं

34

परीक्षण – द्वारा. लतिका जाधव, पुणे
फ़र्क पड़ता है (कवितासंग्रह)
कवि -श्री. सत्येंद्र सिंह

    समस्या से संवाद करती है सत्येंद्र सिंह की कविताएं

कवि श्री. सत्येंद्र सिंह जी का बहुत ही उम्दा 70 कविताओं का यह संग्रह है। इस कवितासंग्रह का आवरण भी प्रकृति, मनुष्य और जीवनचक्र का स्वरूप दर्शाता है। आरंभ में ‘आमुख’ द्वारा कवि श्री. सत्येंद्र सिंह जी ने अपने जीवन के वह संघर्ष के पलों को पाठकों के साथ साझा किया हैं, जो उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय है। यह संघर्ष अपने आप मे आत्मकथ्य का अनूठा रूप लेता है। स्पष्टता के साथ अपने व्यक्तित्व को पाठकों के सामने रखना, अपने गृहस्थी बसाने के दिनों के साथ स्वामिनी के सहयोग को स्वीकारना, यह सब कुछ पढकर कविता उनके सच्चाई से जुड़े अनुभवों के आग से ही उभरी होने का अहसास दिलाती है।इसलिये श्री. सत्येंद्र सिंह जी की कविता केवल कल्पना मे तरंग लेती नहीं। यह कविता हम सब को अपने साथ लेकर जीवन से जुड़े हर समस्या को लेकर संवाद करती है।
शुरुआत में उनकी ‘फ़र्क पड़ता है’ यह शीर्षक कविता है, जो इसी शीर्षक से बनी छह कविताओं कि मालिका है। इन कविताओं में देश में उभरती समस्याओं पर चिंता है, बेरूख़ी नहीं। आज हम समाज माध्यमों द्वारा कितनी घटनाओं को जानते हैं। लेकिन बुराई के खिलाफ आवाज उठाना, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना इस बात पर कभी भी सहमति नहीं होती है। राजनीति को समझना जरूरी है, देशहित में निर्णय लेना जरूरी है। आज का भयभीत वर्तमान कवि के लिये चिंतित करनेवाली अवस्था है, जो इन कविताओं में प्रस्तुत किया गया है।
हर कविता में अनुभवों से उपजे सिंद्धांत का प्रभाव दिखाई देता है।
“वफादारी स्वानुशासन है
अंधभक्ति स्वार्थ और
प्रभावहीन होती है.
बलिदान दोनों में है-
वफादारी बलिदान देती है
अंधभक्ति
बलिदान लेती है.” (पृ.31)
यह कविताएं हम पाठकों से संवाद करती है। हमें कवि के दृष्टिकोण का परिचय देती है। जहाँ दृढता के साथ नम्रता भी है। अपनी कविता ‘आत्मबोध’ मे इस भावना का प्रत्यय आता है।
“…बस इतनी सी प्रार्थना है
कि, मेरी सांसों पर अधिकार
मेरा ही रहने दो.
इससे मुझे अपना
अस्तित्व बोध
होता है.(पृ.37)
इन कविताओं में ‘रेल का दर्द’ कविता हिंदी भाषा का संपर्क भाषा बनाने का प्रयास कब पूरा होगा? इस विचार पर सादगी से हल निकालने की बात कही है।
जिंदगी के उतार – चढाव कितने आश्चर्य जनक होते हैं, हम सभी इस बात पर सहमत हैं। ‘पगडंडी और सडक’ इस कविता में सहजता से यह अनुभव हम पढ सकते हैं।
“जिस दिन कोई
महान
गुज़रा था-
पगडंडी सडक बन गई थी.
लेकिन
उसके गुजर जाने के बाद
दिन पर दिन सड़क घिसटती गई
और
फिर पगडंडी बन गई. (पृ. 70)
गांव से शहर आये हर शख्स को अपना वह आंचलिक अतीत याद आता है। लेकिन शहर में केवल वह अकेला नहीं, ऐसे कई लोग हैं। जो गांव से आहिस्ता आहिस्ता दूर होकर शहर में रहकर वहीं के हो गये। यह पिछले बीसवीं सदी के बदलते भारत का चित्रण है। ‘पितृपक्ष’ बहुत संवेदनशील कविता है, जिसमें मातृपक्ष क्यों नहीं इस गम का अहसास होता है। इस परंपरा में मां की याद और पितृपक्ष का आना, बेहद संवेदनशील लगता है।
‘भारत’ कविता प्रश्न करती है। हम आपस में जो मेरा-तेरा और उनका कर लड़ने पर उतरते हैं। उस द्वेष भावना पर यह कविता प्रहार करती है।
‘शिक्षक दिवस’ कविता दिल को छू लेती है। अपने पिता जो शिक्षक थे, उनके अस्तित्व का अहसास कैसे होता है, इस बात को यह कविता उजागर करती है।

श्री. सत्येंद्र सिंह जी की कविता पाठकों को अपने सिद्धांत, अनुभवों के साथ सामाजिक दृष्टिकोण से भी परिचित कराती है। हमारा बदलता जीवन और हमारा कर्तव्य, आध्यात्मिक उन्नति इन सब से उनका गहराई से नाता है। कविता बदलाव के लिए प्रेरित करती है, लेकिन यह बदलाव समाज को विकास की तरफ़ ले जाने की सोच पर निर्भर करता है।
“..आज वसंतोत्सव है
जो बीता तुम्हारा है
जो बीतेगा, तुम्हारा है
आओ कुछ नया करें
नया सोच भरें” (पृ.118)
हर कविता मे एक विचार है, दृष्टिकोण है, अपनों से जुड़ी ममता है। सबसे ज्यादा हम जिस दुनिया में रहते हैं, यहां के सभी जीवों से सहानुभूति है। इसलिए हर कविता में हमें मानवीय मूल्यों के प्रति गंभीरता नजर आती है।इसलिये हम कवि श्री. सत्येंद्र सिंह जी को इस अनुपम कवितासंग्रह के लिए बधाई देते हैं। उम्मीद है भविष्य में उनकी और भी नयी रचनाओं को पढने का हमें अवसर मिलेगा।
*
फ़र्क पड़ता है (कवितासंग्रह)
कवि- सत्येंद्र सिंह
प्रकाशक- जवाहर पुस्तकालय, सदर बाजार, मथुरा 281001, (उ.प्र.),
मूल्य-200 रुपये.

5 COMMENTS

  1. डॉ लतिका जाधव जी और सोनी जी को बहुत बहुत धन्यवाद, आभार।

  2. Kavita man ko chhu ketibhai, vadtvikta bhi batati hai. aagebje safar je kiye hamari shubhkamnayen. Review bahut achchi likhi hai.

  3. सरजी,
    बहुथ ही सुंदर
    प्रशन्सनीय…

  4. डॉ.लतिका जाधव मॅडम..
    पाठकों के मन को छुनेवाली प्रतिभा और अभिव्यक्ती बहुत महत्त्वपूर्ण तरिकेसे प्रस्तुत की है|धन्यवाद.

    सुनील पंडित,पुणे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here