काव्य भाषा : विचारधारा -नीलम द्विवेदी रायपुर(छत्तीसगढ़)

विचारधारा

दिलों के बीच रचती सेतू बँधन,
जब मिलती हैं दो विचारधारा ,
कभी नफरतों के बीज बोती हैं,
जब टकराती हैं दो विचारधारा।

कभी शोलों सी जल उठती हैं,
कभी नयनोँ से बह चलती हैं,
कभी मिल जाती हैं बड़े प्रेम से,
कभी वगावत करती विचारधारा।

मुश्किल होता है मौन होना,
घुटती है वैचारिक मतभेद में,
जब दो दिलों में ही दूरियाँ हो,
कई जंग लड़ती हैं विचारधारा।

समझौते तो कई कर लेते हैं,
जीवन हर हाल में जी लेते हैं,
पर हर साँस बोझ लगती है,
जब विपरीत हो विचारधारा।

नीलम द्विवेदी
रायपुर(छत्तीसगढ़)

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