स्व.आलोकराज जी की स्मृतियों पर शार्ट फिल्म प्रदर्शित की तथा श्रद्धांजलि अर्पित की

स्व.आलोकराज जी की स्मृतियों पर शार्ट फिल्म प्रदर्शित की तथा श्रद्धांजलि अर्पित की

सागर। नगर के सुप्रसिद्ध साहित्य सागर परिवार के प्रमुख स्व.के.सी.जैन के बड़े पुत्र, साहित्य सेवी रक्षा विभाग के सेवानिवृत्त लेखाधिकारी स्व.आलोकराज जैन के निधन पर रविवार को तिलकगंज स्थित कांफ्रेंस हाल में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहर के संस्कृतिकर्मियों,गणमान्य नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में स्व.आलोकराज जी की स्मृतियों पर आधारित एक शार्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई जिसमें उनके छात्र जीवन से लेकर सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद श्यामलम व पाठक मंच सहित विभिन्न संस्थाओं के साहित्यिक, सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता के अलावा सागर विकास नागरिक मंडल से जुड़ कर किए गए सामुदायिक कार्यों को रेखांकित किया गया। सभा में अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कवि निर्मल चंद निर्मल ने कहा आलोक मेरा बेटा था और मैंने बेटे को खो दिया।सागर वि.वि.में पुरातत्व विभागाध्यक्ष डॉ.नागेश दुबे ने उन्हें एक मृदुभाषी और गंभीर चिंतन वाला व्यक्तित्व बताया।जैन के सहपाठी रहे सागर वि.वि.समाज शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ दिवाकर शर्मा ने उनके स्वभाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका अंतर्मुखी क्रोध अव्यवस्था और अनाचार के खिलाफ सुलगता रहता था।सागर विकास नागरिक मंडल के अध्यक्ष पत्रकार पंकज सोनी ने कहा कि समाज सेवा के ऐसे कार्य जिनमे मैंने केवल युवा और बच्चों को सक्रियता से भाग लेते हुए देखा था वहां इस उम्र के व्यक्ति को इतनी सहजता से उत्साह पूर्वक काम करते देखना मेरे जीवन का प्रथम अवसर था।वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रजनीश जैन ने कहा कि आलोक जी में संवेदनशीलता के साथ साहस कूट कूट कर भरा था।विचार संस्था के अध्यक्ष
कपिल मलैया ने कहा मैं अपने जीवन में ऐसे कम लोगों से मिला हूँ जिन्होंने अपने आदर्शों के भाव को अपने जीवन में उतारा है।संचालन कर रहे म प्र साहित्य सम्मेलन सागर के अध्यक्ष आशीष ज्योतिषी ने उन्हें कर्मठ व्यक्तित्व के रूप में अभिव्यक्त करते हुए कहा कि वे किसी मंच और किसी भी प्रकार की ख्याति के अभिलाषी नहीं रहे।उनका अनौपचारिक व्यवहार उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। स्व.आलोक राज के चित्र पर पुष्पांजलि,स्मृति दीप प्रज्ज्वलन व मेरी भावना गीत के सामूहिक गान पश्चात उनके अभिन्न साथी श्यामलम अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र ने स्व.आलोक राज का जीवन परिचय दिया तथा उनके विश्व विद्यालयीन छात्र जीवन से जुड़े संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि शासकीय नौकरी के दायित्व एवं नियमो में बंधे होने के चलते कला,साहित्य और समाज सेवा के प्रति उनमें जो जागरूकता थी उसे सेवानिवृति के पश्चात स्वतंत्र होते ही उत्साह पूर्वक पूर्ण करने में संलग्न रहे।कवि आर.के.तिवारी और नलिन जैन ने काव्यांजलि दी।
स्वर संगम अध्यक्ष हरी सिंह ठाकुर,श्रीराम सेवा समिति अध्यक्ष डॉ.विनोद तिवारी,एकता समिति से चंपक भाई,संतोष पाठक,हरी शुक्ला,देवेंद्र सेन,विनय मलैया,सुबोध मलैया, डॉ.अलका जैन ने उन्हें अनुकरणीय जीवन के सच्चे प्रतीक के तौर पर व्यक्त किया। स्व.आलोक के बड़े पुत्र अनुभव जैन ने आभार प्रदर्शन किया।
सभा में स्व.जैन के परिजन,सहकर्मी और नगर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

डॉ चंचला दवे सागर

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