काव्य भाषा : आप धीरे धीरे मरना शुरू करते -राजीव रंजन शुक्ल, पटना

नोबल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा (Pablo Neruda) की कविता You start dying slowly मनुष्य जीवन के विषय में काफी कुछ सिखाती है। मनुष्य केवल शरीर त्याग होने से ही नहीं मरता है। हम जब अपने अभिलाषाओं, इच्छाओं और क्षमताओं को नहीं पहचान पातें है , अपने आप को सीमित करने लगते है तब धीरे – धीरे जीवंत जीवन की प्रवाह से कटने लगते है ,और जिंदा रहते हुए भी मृत के सदृश्य हो जाते है । इसी कविता से प्रेरित मैंने भी एक प्रयास किया है , जिसे मैंने “आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते” के रूप मे पंक्तिबद्ध किया है ।

आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते

यदि
सीखने और जीवन को पढ़ने की उत्कंठा
जब बंद करते
समाज की गतिविधियों से कटे रहते
जीवन की धुन जब
आप नहीं सकते सुन
अपने सम्मान का नहीं रखे स्वयं ही मान
अपनी क्षमता की न कर सकते स्वयं पहचान
दूसरों की मदद की करने का न हो आपको ज्ञान
अपने को आप जब सीमित करते
तब
आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते
अपनी आदतों के बनते जब आप गुलाम
जीवन की विविध रंगों से जब भागे मन
दिनचर्या का न बदले ढंग
बातें न करें अनजानों से
केवल मिलें जान पहचानों से
जीवन आपका सीमित होगा
मन बिलकुल भ्रमित होगा
अपनों से आप जब कटने लगते
तब
आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते
यदि
अपने उत्साह ,इच्छा और अभिलाषा की अनुभूति
और इसकी अशांत भावनाओं का स्पंदन
जो आँखों मे लाती है चमक
कुछ अच्छा होने की आस मे हृदय की बढ़ाती धड़कन
इस अनुभूति से यदि आप दूर भागते
तब
आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते
यदि
जब अपने कार्य से न हो संतुष्ट
फिर भी जीवन को पुरानी राहों पर चला रहे पुष्ट
और जब आपके दिल का कोई करीबी
आप से है बनाई दूरी
जीवन की अनिश्चिताओं से स्वयं को सुरक्षित नहीं करते
अपनी सपनों को पूरा करने के लिए प्रयत्न्न नहीं करते
तब
आप धीरे- धीरे मरना शुरू करते

राजीव रंजन शुक्ल,
पटना, बिहार

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