शंकरदत्त चतुर्वेदी स्मरण व्याख्यानमाला व पुस्तक विमोचन समारोह संपन्न

268

बढ़ती संवादहीनता से सामाजिक संरचना को गहरी चोट पहुँची है – डॉ.राकेश शर्मा

चतुर्वेदी जैसे यशस्वी अध्यापक और सुसंस्कृत मनुष्य हमारी बड़ी स्मृति संपदा हैं- डॉ.सुरेश आचार्य

शंकरदत्त चतुर्वेदी स्मरण व्याख्यानमाला व पुस्तक विमोचन समारोह संपन्न

सागर। पंडित मोतीलाल नेहरू उ. मा. शाला के प्राचार्य रहे शिक्षा मनीषी पंडित शंकरदत्त चतुर्वेदी के अष्टम स्मरण पर्व पर व्याख्यानमाला व पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन 27 दिसंबर,रविवार को आदर्श संगीत महाविद्यालय में किया गया।
श्यामलम द्वारा आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में कवि आर.के.तिवारी के काव्य – संग्रह ” नानू ” तथा पंडित पी एन भट्ट द्वारा रचित आर्यभट्ट कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।साथ ही सहा.शिक्षक चंद्रहास श्रीवास्तव,रीछोड़ा टपरा को उनके द्वारा शिक्षा व साक्षरता के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयास के लिए ” शंकरदत्त चतुर्वेदी स्मृति शिक्षा सम्मान 2020 ” से सम्मानित किया गया।
आयोजन की वार्षिक व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता डॉ.राकेश शर्मा ने ” संवाद ही मानव जीवन का प्रमुख आधार है ” विषय पर वक्तव्य
देते हुए कहा कि बढ़ती संवादहीनता से सामाजिक संरचना को गहरी चोट पहुँची है। वैल्यू सिस्टम के टूटने का प्रतिकूल प्रभाव हम समाज व्यवस्था पर स्पष्ट देख सकते हैं।उन्होंने
आपने दृष्टांत के साथ संवाद के सकारात्मक प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि आज मीडिया की परिभाषा और उसका कर्म बदला हुआ नज़र आता है।टेक्नोलोजी ने भौगोलिक दूरियाँ पाट दी हैं लेकिन इंसानो के बीच अथाह दूरियाँ पैदा कर दी हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर विधायक शैलेंद्र जैन ने इस अवसर पर स्व.चतुर्वेदी का स्मरण करते हुए उनकी पुत्री द्वारा अपने पिता की स्मृति में प्रतिवर्ष किए जा रहे इस आयोजन की सराहना करते हुए उसे भारतीय संस्कृति का गौरवमयी परम्परा का अध्याय कहा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर सुरेश आचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति उत्सव और स्मरण धर्मा है।जन्म से मुक्ति तक यहां उत्सव हैं। अपने पूर्वजों का स्मरण एक तरह से अपनी कृतज्ञता का ज्ञापन ही है।पंडित शंकरदत्त चतुर्वेदी जैसे यशस्वी अध्यापक और सुसंस्कृत मनुष्य हमारी बड़ी स्मृति संपदा हैं।उन्हें स्मरण करने से सांस्कृतिक,साहित्यिक और शैक्षणिक प्रवृत्तियां बलवान होती है,इससे समाज की उन्नति और कल्याण होगा।कार्यक्रम में विमोचित काव्य – संग्रह “नानू” के रचनाकार आर.के.तिवारी और स्मृति सम्मान से सम्मानित हुए शिक्षक चंद्रहास श्रीवास्तव को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने उनके श्रम और अवदान को उल्लेखनीय बताया।
एम.डी.त्रिपाठी ने सारस्वत अतिथि मणीकांत चौबे द्वारा विमोचित पुस्तक पर की गई टिप्पणी का वचन करते हुए कहा कि कृति में सहज सरल शब्दों का प्रयोग सुंदर है वही बोलचाल की भाषा का घालमेल रोचकता लाता है।कविता पर प्रभावी विवेचना करते हुए समीक्षक टीकाराम त्रिपाठी ने काव्य संग्रह ” नानू ” के रचनाकार आर.के.तिवारी के उपन्यास करामजली के संदर्भ में अच्छा कथाकार बताते हुए कहा कि काव्य संग्रह की रचनाएं यदि विस्तारित कर दी जाएं तो वे कथा/आत्म कथा/संस्मरण के रूप में अधिक प्रभावोत्पादक होंगी।कहानीनुमा गद्य काव्य ही हैं जहां वैयक्तिक अनुभूतियों की विशद विवेचना है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों तथा उपस्थित जन द्वारा स्व.चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।कवयित्री जयंती सिंह लोधी ने स्वरचित स्मृति गीत का गायन किया। स्व.चतुर्वेदी की तीन वर्षीय प्रपौत्री राजे द्वारा की गई सरस्वती वंदना ने अभिभूत कर दिया।अनुज सोनी ने भी काव्य प्रस्तुति दी। स्व.चतुर्वेदी की पुत्री डॉ.अंजना चतुर्वेदी ने उनका जीवन परिचय तथा स्वागत उद्बोधन दिया।अतिथि स्वागत एडवोकेट अमित तिवारी,उमा कान्त मिश्र,कपिल बैसाखिया, आशीष ज्योतिषी,हरी शुक्ला, डॉ.विनोद तिवारी ने किया सम्मान पत्रों का वाचन हरी सिंह ठाकुर और रमा कान्त शास्त्री ने किया।संचालन स्व.चतुर्वेदी की बड़ी पुत्री रंजना पाठक इंदौर ने किया तथा श्यामलम के सह सचिव संतोष पाठक ने आभार माना।
इस अवसर पर शिव शंकर केसरी, शिव रतन यादव,डॉ.सुजाता मिश्र,माधव चंद्रा,मुन्ना शुक्ला, डॉ.आशुतोष मिश्र, डॉ.महेश तिवारी,डॉ.राजेश दुबे,डॉ.राजेंद्र यादव,डॉ.लक्ष्मी पाण्डेय,डॉ. कविता शुक्ला,अशोक तिवारी अलख, अभिषेक जैन,डॉ.अरविंद बोहरे,के.एल.तिवारी अलबेला,मुकेश तिवारी,डॉ.अशोक कुमार तिवारी,मकसूद खान,अम्बर चतुर्वेदी चिंतन, नवल स्वर्णकार,वीरेंद्र प्रधान,अखिलेश पाठक, प्रवीण लोकरस,उदय खेर,अभिनवदत्त दुबे, भगत सिंह ठाकुर,सुनीता श्रीवास्तव,मितेद्रसिंह सेंगर,पुष्पेंद्र दुबे,पुष्पदंत हितकर,डॉ.आर.आर. पाण्डेय,जी.एल.छत्रसाल,राजकुमार रिछारिया, ओ.पी.रिछारिया,जे.बी.एस.रायकवार,भगवानदास रायकवार,ममता भूरिया,राधा कृष्ण व्यास, देवीसिंह राजपूत,पी.आर.मलैया,कैलाश तिवारी विकल,दामोदर अग्निहोत्री, उमाशंकर रावत, स्नेहा श्रीवास्तव,सुयश चतुर्वेदी,मेघा चतुर्वेदी,डॉ.सुधा दुबे,डॉ.अंजना नेमा,डॉ.रश्मि दुबे,अर्जित कौशिक,देवांश कौशिक,धीरेंद्र सेन की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

सागर से डा चंचला दवे
म प्र

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here