काव्य भाषा : अटल बिहारी वाजपेयी – सपना, दिल्ली

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अटल बिहारी वाजपेयी

जग में जब तक
सूरज, चाँद, सितारे
तब तक अटलजी
रहते रहेंगे बीच हमारे

भारतवासियो का सौभाग्य
मिला उन्हें अटल जैसा
अनमोल रत्न……
राजनीति में थे संत
जिनका होता था सम्मान
करते सभी नमन
हर दल में..

साहित्य के वे धूमकेतु
अनुभवो की झोली से
साहित्य जगत को दे गए
अनेक रचनाएँ दान
हिल उठता साहित्य प्रांगण
कर मात्र उनका गान…

देश प्रेम का जज्बा रहा
सबसे पहले
बाकी सब बाद में
भीष्म समान सब सुख त्याग
जीवन कर दिया अर्पित
देश कल्याण में……

राष्ट्रवाद के सिरमौर थे
परम्पराओ को तोड़कर
नवभारत रचा
गाँव का हो विकास
जुड़े हर गाँव शहर से
ऐसा सपना रखा
योजनाये कई बना कर
गाँव का किया विकास…..
अपने कर्मों से रचा
अपना इतिहास…..

जग को न जाने कितनी सौगात
देकर वे विदा हुए
हर मन में निवास आपका
बीच हमारे सदा रहेंगे
बीच हमारे सदा रहे।

सपना, दिल्ली।

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