काव्य भाषा : जाड़े की धूप -भावना गौड़ ग्रेटर नोएडा

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जाड़े की धूप
विधा – वर्ण पिरामिड

ये
जाड़े
की धूप
गर्माहट
औषधि बन
नव जीवन में
अमृत बरसाती।

ये
आँख
मिचौली
बादलों से
सूर्य किरण
हँसती मुस्काती
प्रफुल्लित करती।


सर्द
जाड़े की
कुनकुनी
धूप में तुम
इठलाती हुई
उजली किरण हो।

ये
धरा
अम्बर
की शरद
बहार आई
मुस्कुराहट दे
खुशियां बिखेरना।

भावना गौड़
ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)

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