निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पालक गाँधी और सरदार पटेल का आशीर्वाद लेकर सड़क पर उतरे

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निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पालक गाँधी और सरदार पटेल का आशीर्वाद लेकर सड़क पर उतरे

इटारसी।
निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पालकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। शहर के सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने की गुहार के साथ आज अभिभावकों की एक छोटी सी टोली मजबूत इरादे से सड़क पर अभिभावकों को जागरूक करती दिखाई दी। टोली के हाथ में अपनी 15 सूत्रीय मांग पत्र की कॉपी थी सर्वप्रथम अभिभावक टोली ने गाँधी स्टेडियम में गाँधी प्रतिमा पर मालार्पण कर स्टेशन मेन रोड पर मांग पत्र वितरित किये इसी श्रृंखला में सरदार पटेल की प्रतिमा पर मालार्पण कर न्यास क्षेत्र में मांगपत्र का वितरण किया गया।

पालकों की समस्या और सुझाव भी प्राप्त किये

मांग पत्र वितरण के दौरान कई अभिभावकों ने अपनी समस्या और सुझावों को अभिभावक टोली से साझा किया।
कान्वेंट स्कूल के अभिभावक महेंद्र सिंह पाल ने बताया की स्कूल प्रबंधन संवाद करना ही नहीं चाहता वे निदान करने की जगह पूरी टियूशन फीस लेने पर अड़े हुए है।
अभिभावक नीरज जैन ने कहा की “सत्र का मतलब होता है जब अभिभावक अपने बच्चो को शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूल की कस्टडी में रोजाना सौपे और शिक्षक स्कूल के कैम्पस में बच्चे को शैक्षणिक अध्ययन का कार्य करे। कोरोना काल में बच्चे अभिभावकों के पास ही रहे। अभिभावकों ने जब बच्चो को स्कूल की कस्टडी में भेजा ही नहीं तो स्कूल की टियूशन फीस का भी सवाल नहीं उठता। हाँ स्कूलों ने शासन की मंशा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन माध्यम के जरिये पाठ्यक्रम पढ़ाने का प्रयास जरूर किया है पर वो भी ना काफी है की निजी स्कूल को उनकी मनमानी भरी भरकम फीस दी जाये।

पालकों ने प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्र में भी रखा कदम

पालको ने आज इटारसी के प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्रो में भी अपने मांग पात्र वितरित किये। नायब तहसीलदार को अभिभावकों ने सयुक्त हस्ताक्षर के साथ अनुविभागीय अधिकारी के नाम मांग पत्र सौंपा। न्यायिक परिसर में मौजूद अधिवक्ताओ दवारा अभिभावकों को न्यायिक और विधिसम्मत सहयोगी बनने का प्रस्ताव रखा जिस पर अभिभावक अपनी इस रविवार की साप्ताहिक बैठक में निर्णय लेंगे।

सरकार की मंशा नहीं

प्रदेश के सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के फीस नियामक आयोग गठन के निर्देश कई बार उच्च न्यायालय द्वारा किया गया 2011 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने मध्यप्रदेश फीस नियामक आयोग गठन करने का आदेश दिया था। उसके बाद से शिक्षा विभाग कागजों पर आयोग बनाता रहा, पर लागू नहीं करा सका। कोरोना के इस संकट काल में न तो फीस नियामक आयोग का पता है न ही शिक्षण शुल्क नियंत्रण अधिनियम का।

अभिभावकों का तर्क

कोरोनाकाल में आर्थिक परेशानी के कारण कई अभिभावक फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं अभिभावकों का कहना हैं की नेक स्कूल संचालक अभिभावकों की स्थिति देख कर राहत दे रहे है वही कुछ मुनाफाखोर स्कूल संचालक उच्च न्यायालय के आदेश को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। निजी स्कूल आरटीई व फीस रैग्युलेशंस का उल्लंघन कर रहें। लेकिन शासन इस समस्या की अनदेखी कर रहा है। इस कारण अभिभावकों को सड़क पर आने की जरूरत पड़ी।

इस सक्रीय प्रयास में शामिल अभिभावक

रमेश चौधरी, राजेंद्र सोनी, अजय रणजीत सिंह राजपूत, नीरज जैन, शैलेन्द्र पाली, विशाल जैन, विकास जैन, विशाल जैन, अजित जैन, श्याम सिंह तोमर, शंकर तिवारी, वीरेंद्र दीवान, राजीव मोहबिया, मनीष कुमार संतानी, संदीप मालवीय ।

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