काव्य भाषा : बेटियां – सुनीता राजेश कुमार परसाई होशंगाबाद

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बेटियां

बापू उत्तर तुम दे दो,
क्यों घृणा सब हमसे करते ,

दो वक्त की रोटी के लिए
क्यों दादा दादी की सुनते

हम कोमल नन्हें अरमान है
ख्वाव तुम्हारे बन जायेंगे

पंख हमारे हमको दे दो
हम आसमान में उड़ जायेंगे ,

हम बेटी से बेटा बनकर
दुनिया को दिखला देंगे ,

बापू मेरा सूरज बनकर
घर में उजाला कर देंगे ।

सुनीता राजेश कुमार परसाई
होशंगाबाद