काव्य भाषा : मेरी बेमतलब सी बातें – नीलम द्विवेदी रायपुर, छत्तीसगढ़

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मेरी बेमतलब सी बातें

याद तुम्हें जब भी आएँगी,
वो मेरी बेमतलब सी बातें,
अर्थ खोजने खुद आओगे,
अर्थहीन लगती जो बातें।

तेरी नजरों मे जिन प्रश्नों का,
है आज जरा भी मोल नहीं ,
कल समझोगे तुम भी ये सच,
ये मोती से कम अनमोल नहीं।

बचकानी बन तुझे हँसाने आतीं,
रुठो जब भी तुझे मनाने आतीं,
और कभी मेरे मन की पीड़ा भी,
बरबस तुम तक पहुँचाने आतीं।

थककर अब किस ओर चली हैं,
वो अनसुनी बेसिरपैर सी बातें,
जो बातें तुम झेल नहीं पाते थे,
अब छिपा लिया अंतर में अपने।

अब मेरी आँखों से बरस रहीं हैं,
जाती हैं खुद का अस्तित्व मिटा,
नहीं सताएँगी ये तुमको फिर से,
खत्म हुईं सब बेमतलब सी बातें।

नीलम द्विवेदी
रायपुर, छत्तीसगढ़

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