काव्य भाषा : इस दिवाली यह ही संदेश – डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

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इस दिवाली यह ही संदेश

रंग बिरंगी चिड़ियों
के रंग लगते है तुम्हे सुन्दर
भाता है तुम्हें
संगीत उनका
मन खुश कर देती है
उड़ान उनकी
वो तुम्हारे जीवन मे
भरती हैं उमंग
है न
तो क्यों तुम चाहते हो
जीवन तुम्हारा हो जाये बदरंग
हो जाये उनका
संगीत विलीन,और
उड़ान
हो जाये समाप्त
हो जाएं खुशियों का अन्त
इस दीपावली
नही न
तो बचा लो न
ये सब
पटाखों के शोर से,
रॉकेट की जलती उड़ान से
या चकरी व अनार के
दूषित धुएं से
इन सबसे निकलने वाली
अग्नि से जलने से
जीवन बचा सकते हो तुम
चिड़यों का,
पशुओं का
अपनों का
अपना
आओ न
बचाएँ जीवन
बचाये प्रदूषण
बचाएँ धन
बचाएँ देश
हो इस दीवाली
यह ही
संदेश

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल