सबक-ज़िन्दगी के : खुद को खुद की प्राथमिकता बनाएं -डॉ सुजाता मिश्र सागर

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सबक-ज़िन्दगी के:
खुद को खुद की प्राथमिकता बनाएं

परिवर्तन की शुरुवात सदा खुद से कीजिये। यदि आप चाहते हैं कि लोग आपसे प्यार करें,तो पहले खुद से बेइंतेहा प्यार कीजिये। यदि आप चाहते हैं कि लोग आपकों सम्मान दें,तो पहले आप स्वयं को सम्मान देना सीखिए,खुद को किसी से ,किसी भी मायने में कमतर मत समझिए(सुधार के लिए सदा तैयार रहिये)यदि आप चाहते हैं कि जिस तरह आप लोगों को उनके सपने पूरे करने में मदद करते हैं,वैसे ही लोग भी आपकी मदद करें,तो सर्वप्रथम अपने सपनों , रुचियों और जरूरतों को अपनी प्राथमिकता बनाइये, प्रेम,दोस्ती, कर्तव्य किसी भी भावनात्मक दबाव में अपने सपनों,जरूरतों या रुचियों से एक सीमा से ज्यादा समझौता मत कीजिये, नहीं तो दूसरा व्यक्ति आपके सपनों को कभी तवज्जों देगा ही नहीं, आपकों और आपके सपनों,जरूरतों और रुचियों को सदा “होल्ड” पर रखेगा।वक्त बीतता जाएगा, सामने वाला आपको टालता ही रहेगा, और आप इतने महान होंगे कि बीते हुए वक्त की बर्बादी और नाकामी के लिए भी खुद को कोसेंगे, क्योंकि आपने स्वयं कभी खुद को खुद की प्राथमिकता बनाया ही नहीं, तो भला आपके जीवन में आने वाले लोग क्या करते। जो आया,वहीं आपका भावनात्मक इस्तेमाल करने लगा, आपने जो बर्ताव दूसरों के प्रति रखा उसका 10 %सकारात्मक रूप भी आपकों रिटर्न में नहीं मिलता,बल्कि अब तो आपके आस – पास मौजूद रिश्तों के झुंड को आदत पड़ जाती है आपकों टाल देने की।इसलिए समय रहते संभलिए, खुद को खुद की प्राथमिकता बनाइये।अपेक्षाएं सिर्फ खुद से रखिये,और उन्हें पूरा करने की हर सम्भव कोशिश कीजिये। जीवन की राह में जो जितना साथ निभा दे उसका धन्यवाद कीजिये,पर निर्भर कभी किसी पर , किसी भी रूप में मत होइए।सम्भवतः आप जिसे अपना बड़प्पन समझ कर झेल जाते हैं अधिकांश लोगों को वही आपकी कमजोरी लगता है।ज़िन्दगी बहुत लम्बी होती है, आज कोई क्या कहता है,क्या सोचता इस भय में कब तक जिएंगे? समय रहते अपनी ज़िंदगी को अपने मुताबिक जीना सीखिए ।

डॉ सुजाता मिश्र
सागर

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