काव्य भाषा : दिवाली है आई – राजीव रंजन शुक्ल पटना

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दिवाली है आई

दिवाली है आई
घर- घर की सफाई
दिवाली है आई
त्योहारों की शुरुआत
खत्म होगी निराशाओं की रात
अनुपयोगी सामानों की विदाई
रद्दीवालों की शुरू हुई खोजाई
बच्चे बना रहें घरौंदा
कुल्हिया चुकिया
मिट्टी का दीया
सीरीज बल्ब की लड़ी
दीया को देने साथ
सबके छतों से लटकी
गणेश –लक्ष्मी की मूर्ति
लोगों की भीड़
बाज़ारों मे ढूंढती
रंगोली के रंग
रोशनी के संग
पटाखों की गूंज
फरही चना लावा
गुंड़ के लड्डू
पर
बच्चों का धावा
घिरनी का घूमना
बच्चों का उछलना
पकवानों की मिठास
अच्छा होने की आस
माँ लक्ष्मी का मिले आशीर्वाद
महामारी का हो नाश।

राजीव रंजन शुक्ल
पटना