काव्य भाषा : मुबारक दिन – डॉ. साधना अग्रवाल ,ग्वालियर (म.प्र.)

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मुबारक दिन

करती इंतजार आज का, दिन होता है खास।
भूल न जाये मेरे प्रिय, करती मैं अरदास।।

आँख खुले तो पाऊँ सबको, अपने दिल के पास।
मिलकर सब एक स्वर में बोले, मुबारक शुभ दिन मास।।

बैठ अकेली पीछे देखूँ, दिन बहुत दिये गुजार।
समय चक्र की धार में, सब कुछ दिया बिसार।।

उछल कूद में बीता बचपन, यौवन ने रचा है मधुवन।
भाग-दौड़ जीवन की अड़चन, धैर्य न टूटे, हारूँ न भगवन।।

बहने वाली हर हवायें, हंसी – खुशी से बात करें।
कोमल मन, सरल साधना, नई उमंग, स्फूर्ति संचार करें।।

डॉ. साधना अग्रवाल
ग्वालियर (म.प्र.)

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