सबक जिंदगी के : दिमाग को प्रदूषण मुक्त रखिये-डॉ सुजाता मिश्र,सागर

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सबक जिंदगी के –
दिमाग को प्रदूषण मुक्त रखिये

मनुष्य जितना किसी घटना के घटने से दुःख नहीं पाता उससे अधिक दुःख उन घटनाओं को याद कर – कर के पाता है। उन पर सोच – सोच कर भीतर ही भीतर घुटता जाता है। वक्त तो पल में गुज़र जाता है किंतु हम उसे अक्सर एक लंबे अरसे तक थामे रहते हैं,कभी – कभी जीवन भर ही। हम जानतें है कि फलां विषय पर बात करने से, फलां समस्या पर विचार करने से हमें मानसिक तकलीफ होती है, हमारा समय और ऊर्जा बर्बाद होती है। हम यह भी जानतें है कि उक्त विषय या समस्या का कोई समाधान हमारें पास नहीं है। फिर भी हम बार – बार उन्हीं विचारों के जाल में उलझते जातें हैं, जिनमें उलझ कर हमें अंततः कष्ट ही मिलता है।

नकारात्मक विचारों की यह धुंध कब हमारें दिलों – दिमाग पर छा जाती है, हावी हो जाती है, इसका अक्सर हमें जब तक बोध होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अतः दिमाग को ऐसे वैचारिक प्रदूषण से बचाइए। प्रदूषण किसी भी रूप में हो वह स्वस्थ के लिए खतरनाक ही होता है। जीवन में हमेशा वही नहीं होता जो आप चाहते है,किन्तु जो हो रहा होता है अक्सर वही उस समय की जरूरत होती है।किंतु अपनी अधूरी ख्वाहिशों के गम में डूबा व्यक्ति अक्सर वही नहीं देख पाता जो सबसे जरूरी हो। दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक सदा अपने मन की करने वाले । दूसरे सदा क्या जरूरी है,क्या होना चाहिए का विचार कर जरूरी काम करने वाले। परिपक्वता हमेशा मन की करने में नहीं, बल्कि सही और ज्यादा जरूरी कार्य करने में है। तय कीजिये कि आपके जीवन में ज्यादा जरूरी क्या हैं? ज्यादा मायने क्या रखता है?

डॉ सुजाता मिश्र,सागर

2 COMMENTS

  1. बहुत ही सही लिखा है मैडम आपने ,आपके लेख हमेशा कुछ नया सिखाते हैं ,आप बहुत ही सटीक बाते बताती हैं ,बहुत बहुत धन्यवाद् आपका ।

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