0 तरकश : कोरोना : नागरिकों को खुद करना होगा मुकाबला – विनोद कुशवाहा

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कोरोना : नागरिकों को खुद करना होगा मुकाबला

– विनोद कुशवाहा

भोपाल , इंदौर , ग्वालियर , जबलपुर के बाद अब प्रदेश में एक नया हॉट स्पॉट सामने आया है । नरसिंहपुर । पहले बात जबलपुर की । अभी कुछ दिन पहले ही किसी न्यूज़ चैनल में बताया गया था कि जबलपुर के मुक्ति धाम में स्थान नहीं मिलने के कारण एक मृतक का अंतिम क्रिया कर्म जमीन पर करना पड़ा था । मतलब कोरोना के मृतकों की संख्या दिनों – दिन बढ़ती जा रही है । उसके लिये जिम्मेदार और कोई नहीं बल्कि नागरिक खुद हैं । न तो वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और न ही बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग कर रहे हैं । सर्दी जुकाम , खांसी , बुखार को लोग साधारण मान कर चलते हैं , तो कभी निमोनिया ही समझ कर अपनी मन मर्जी का इलाज करते रहते हैं । अंततः निकलता कोरोना ही है । हारकर सरकार ने भी फिर सख्ती बरतना शुरू कर दिया है । कभी हमारे प्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ में तो लॉक डाउन की प्रक्रिया पुनः शुरू की जा रही है । धीरे – धीरे हम भी उसी तरफ बढ़ रहे हैं । इधर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही इन दिनों चरम सीमा पर है । होशंगाबाद से जारी विभागीय बुलेटिन में आंकड़ों की बाजीगरी का खेल बदस्तूर चल रहा है । इस कारण कोरोना से मृतकों के सही आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं । नगर में कंटेन्मेंट जोन का दायरा सीमित होता जा रहा है । यही वजह है कि होम क्वारंटाइन किये गए नागरिक खुले आम बाजार में घूम रहे हैं । दुकानों पर भी बैठ रहे हैं । व्यवसाय भी कर रहे हैं । जबकि शहर में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है । मुख्य नगरपालिका अधिकारी हिमेश्वरी पटले की सक्रियता से नगरपालिका कार्यालय तीन दिनों के लिये बन्द कर दिया गया । नगरपालिका में नागरिकों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है । अन्यथा बड़ी संख्या में अधिकारियों – कर्मचारियों के संक्रमित होने का खतरा मंडरा रहा था । जहां एक ओर विज्ञान शिक्षक राजेश पाराशर मास्क नहीं पहनने वालों का सर्वे कर रहे हैं , वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग , पुलिस विभाग तथा नगरपालिका परिषद का संयुक्त अमला बिना मास्क के घूमने वालों के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही को लेकर सख़्त नजर आ रहा है । प्रशासन भी ये बात अच्छी तरह जान गया है कि केवल समझाईश से काम नहीं चलने वाला । प्रदेश के कोने – कोने से अव्यवस्थाओं एवं लापरवाहियों के किस्से सुनने को मिल रहे हैं । कहीं मृतकों की अदला बदली हो रही है तो कहीं वक्त पर इलाज न मिलने या सुविधाओं के अभाव में जानें जा रही हैं । जबलपुर का ऐसा ही एक प्रकरण प्रकाश में आया है । जहां पति की मौत के दस दिन बाद पत्नी नेहा तिवारी ने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी । उनका कहना है कि उनके पति आशीष की असामयिक मृत्यु के लिए स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदार है । नेहा का दावा है कि यदि समय पर उनके पति आशीष तिवारी को ऑक्सीजन लगा दी गई होती तो उनकी इस तरह मौत नहीं हुई होती । इन लापरवाहियों और अव्यवस्थाओं के खिलाफ नेहा तिवारी का इरादा कोर्ट जाने का है । चलो किसी ने तो हिम्मत की । आगे बढ़ो नेहा । आपको हम सबकी शुभकामनाएं ।

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