काव्यभाषा : फिर मुस्कुराएगा संसार -भारती यादव’ मेधा ‘ रायपुर छत्तीसगढ़

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फिर मुस्कुराएगा संसार

कैसी है यह विपदा भारी,
फैली चहुं ओर कोरोना वैश्विक महामारी….
नाम में ही है जिसके रोना,
कितना दुष्कर होगा उसका होना…
बदल दिया है मानव जीवन एक विषाणु ने ऐसे
मेल मिलाप खतम कर ,कर दिया है अकेले….
वैसे तो विज्ञान ने पहुंचा दिया है चांद के पार
फिर भी जाने कैसे कर ना पाया अदृश्य शत्रु पर वार….
डॉक्टर,पुलिस, सफाईकर्मी और नर्सिंग स्टाफ
इन्हीं पर टिका है अब सारी दुनिया का भार….
कर्तव्य हमारा भी बनता है
साफ सफाई और व्यक्तिगत दूरी बना
कोरोना के रोकथाम में दें योगदान अपना….
दोहन किया था हम मानवों ने प्रकृति का अपार
पेड़ पौधों से श्रृंगारित धरा को बना दिया था बंजर उजाड़….
कोरोना ने जब बैठा दिया सबको घर के अंदर
करने लगी प्रकृति भी अपना पुनर्नवीकरण..……
स्वच्छ हुई हवा भी ,नदियां भी हो गई साफ
संवार कर स्वयं को प्रकृति खुद ही कर रही इंसाफ…..
आधुनिकता की होड़ छोड़,पुरातन परंपरा अपनाने पर जोर दिया
इस कोरोना ने तो बिखरे परिवारों को भी जोड़ दिया
इच्छाओ और आवश्यकताओं में अंतर को समझाया
अंतर्मन से मिलने का मौका दिलवाया….
जीवन के प्रति बदल नजरिया,रिश्तों की अहमियत भी समझाया
इस संदर्भ में तो कोरोना गुरु बन कर आया…..
फिर भी नकार नहीं सकते हैं कोराना की भयावहता
दूर करो अब यह बीमारी हे गणेशा विघ्नहर्ता…..
ना रहे कोई अंश इस धरा पर विषाणु का जरा भी
फिर से लाओ इस संसार में मुस्कुराहटों का दौर वही…
यकीन है फिर से मुस्कुराएगा सारा संसार
खुल जाएंगी गलियां और भर जाएगा बाज़ार.….

भारती यादव’ मेधा ‘
रायपुर छत्तीसगढ़

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