काव्यभाषा : कोरोना – मोहिनी पथिक ,गोण्डा,उत्तरप्रदेश

21

कोरोना

सकल राष्ट्र में छाया अब,
कोरोना का साया है।
अगणित बार सुन चुका मानव,
राष्ट्र पर खतरा मंडराया है।।

रण गर्जन से भी जो भयभीत न था,
वह मानव आज क्यों घबराया है?
निशि- वासर जो रहता था स्वतंत्र,
वह आज कैद हो पाया है।।

प्रतिदिन-प्रतिक्षण आती खबरें,
कोई पाज़िटिव, कोई निगेटिव आया है।
राष्ट्र पर संकट छाया है,
यह कोरोना की माया है।।

मोहिनी पथिक
गोण्डा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here