काव्यभाषा : कैसे बदल रहा है मेरा बेटा पल पल-कमल श्रीमाल,फालना,राजस्थान

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कैसे बदल रहा है मेरा बेटा पल पल

कैसे बदल रहा है मेरा बेटा पल पल
उम्र के साथ उसमें हो रही हैं हलचल
पहले कहता था पापा घर नहीं आये
अब कहता है निकल घर से चल चल

जब उसका हुआ था आगमन
मेरा घर बना था महका चमन
एक वर्ष तक जब भी वो रोया था
चुप होकर मेरे सीने पे सोया था
विच्छोह मेरा वो सह नही पाता
बिन मेरे वो रह नहीं पाता
मैं पापा, मेरा राजा मुनिया वो
उसकी दुनिया में मेरी दुनिया वो
प्यार हमारा देख लोग जाते जल जल
कैसे बदल रहा है मेरा बेटा पल पल

अब उसकी दुनिया ने पाया विस्तार
मेरे साथ खिलौने भी बने उसका प्यार
बेशक करता था वो खिलौने का जमाव
पर मुझसे कम नही हुआथा उसका लगाव
जब भी आँफीस से घर आता था
दरवाजे पे खड़ा उसे पाता था
देख मुझे मन उसका खिल जाता था
मैं भी दौड उसे गले लगाता था
तीन साल तक यही दौर चलता रहा
असीम प्यार हमारे बीच पलता रहा
नदी प्रेम की बहती रही कल कल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल

अब परिवर्तन की हवा थोड़ी तेज हुई
मेरे साथ मित्र उसके काॅपी किताब मेज हुई
अब वो स्कूल, ट्यूशन ,क्रिकेट खेल रहा था
व्यायाम भी करता था दण्ड भी पेल रहा था
अब भी उससे मुझको इतनी राहत थी
उसके दिल में मेरे प्रति गहरी चाहत थी
साथ मेरा उसका बना रहा हर पल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल

सत्रह का कब हुआ आया ना जरा भी ध्यान
मेरा बेटा बन गया बाँका गबरु जवान
अब उसके शौक हो गये बड़े विचित्र
पार्टी मोबाइल मोटरसाइकिल और मित्र
धीरे धीरे उसकी मुझसे थोडी दूरी हुई
कुछ उसकी, कुछ मेरी मजबूरी हुई
अब कुछ कम ही उससे मुलाकाते होती थी
कुछ खास मुददो पर ही उससे बातें होती थी
ना जाने कब वो कॉलेज पास हुआ
बिना हमें बताये किसी का खास हुआ
दूर ना हो जाये वो डर रहता आज कल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल

वो मशगूल हो गया अपने परिवार मे
मैं अब भी लिपटा रहा उसके प्यार मे
परिवर्तन की हवा अब आँधी मे बदली
मुझे अकेला छोड़ पत्नी चल दी
मैं तन्हा असहाय निर्बल लाचार हो गया
वो लडने लगा मुझसे, वो प्यार खो गया
मेरे जीवन मे प्रलय आज हो गया
मैं अनउपयोगी नजरअदांज हो गया
लगा जीवन है अब गहरा दल दल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल

उस दिन मेरे घर में तूफान आ गया
घर से निकलने का ऐलान आ गया
बहू, बेटे, पोते ने मूझे घर से निकालने की ठानी
में रोता रहा,गिडगिडाता रहा उसने एक न मानी
परिवर्तन की आंधी का ऐसा भूचाल आया
मारपीट कर उसने मुझे वृद्धाश्रम पहुंचाया
जो करता था मेरे आने का इंतजार पल पल
वो आज कह रहा था निकल घर से चल चल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल

सारे रिश्ते नाते वो पल में तोड़ गया
वो निर्मोही मुझे अकेला छोड़ गया
जो नहीं रह पाता था मेरे बिन एक पल
समझ नहीं आया वो गया कैसे बदल
मन में आस थी वो फिर आयेगा
हाथ पकड़ मुझे घर ले जायेगा
अपनी भूल का उसे अहसास होगा
मेरा बेटा फिर से मेरा खास होगा
मेरे सारे सपने यूँही जल गये
दिन महीने साल निकल गये
भेजे संदेशे मिल में तर जाऊगाँ
एक बार देखलू तो चैन से मर जाऊगाँ
जर्जर हो गयी थी मेरी काया
पर वो निर्मोही मिलने नहीं आया
में मृत्यु शैया पर पड़ा रहा
मिलने उससे मौत से अडा़ रहा
सोचा कुछ उसकी मजबूरी रही होगी
यूँही नहीं मुझसे दूरी रही होगी
मैने मन उसके प्रति साफ किया
खुले दिल से उसको माफ किया
की अतिंम प्रार्थना भगवान से
वो जिये शान ,मान, सम्मान से
हर खुशी उसके जीवन में आये
कोई कष्ट उसे छू तक न पाये
बना रहे उसपे आशीर्वाद महाकाल का
बाल भी बांका ना हो मेरे लाल का
किया प्रभु का मन से ध्यान
तत्क्षण छोड़ दिये अपने प्राण
छोड़ सभी को दुनिया से मै गया निकल
कैसे बदल रहा हैं मेरा बेटा पल पल
उम्र के साथ उसमें हो रही हैं हलचल
पहले कहता था पापा घर नहीं आये
अब कहता हैं निकल घर से चल चल

कमल श्रीमाल एडवोकेट
नेहरु कालोनी फालना
जिला पाली राजस्थान
9829105535

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