तरकश – एक डॉक्टर : कलेक्टर पर भारी – विनोद कुशवाहा , स्वतंत्र पत्रकार

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एक डॉक्टर : कलेक्टर पर भारी

– विनोद कुशवाहा
स्वतंत्र पत्रकार

होशंगाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों लापरवाहियों , नाफरमानियों , अनुशासनहीनता और अव्यवस्थाओं का आलम है । कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है । कितने सी एम एच ओ , कितने सिविल सर्जन बदल गए परन्तु व्यवस्था जस की तस है । वही हाल निरीक्षण के हैं । तहसीलदार से लेकर प्रमुख सचिव तक जिला अस्पताल और इटारसी के डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी शासकीय अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन व्यवस्थाओं में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ । अस्पताल के अधीक्षक डॉ शिवानी की छाती हर निरीक्षण के बाद चौड़ी हो जाती है क्योंकि आज तक कोई माई का लाल उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाया । चाहे अधिकारी हो या राजनेता । आखिर कैसे कोई उनका कुछ बिगाड़ेगा । कभी वे कूदकर अधिकारियों की गोद में बैठ जाते हैं तो कभी राजनेताओं की गोद में खेलने लगते हैं । जिस दिन आम आदमी सूचना के अधिकार के अन्तर्गत् कोरोना के बजट का हिसाब मांगेगा उस दिन डॉक्टर शिवानी सारी चौकड़ी भूल जायेंगे । उनकी नाक के नीचे मरीजों की जान के साथ किस तरह खिलवाड़ हो रहा है ये देखकर आप हैरान हो जायेंगे । जिस वार्ड में कोरोना के मरीज एडमिट हैं उसी वार्ड के प्रांगण में कोविद टेस्ट किये जा रहे हैं । टेस्ट कराने पहुंच रहे नागरिकों के साथ डॉक्टर और वार्ड बाय तक जानवरों से बदतर व्यवहार कर रहे हैं । मैं स्वयं उनके दुर्व्यवहार का शिकार हुआ हूं । खैर ।

अब हम चलते हैं माखननगर । जहां एक स्थानान्तरित महिला बी एम ओ, तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक पर भारी पड़ रही है । ये वही बी एम ओ है जिसके शासकीय आवास पर लोकायुक्त का छापा पड़ चुका है । छापा पड़ने के बाद उक्त बी एम ओ का स्थानांतरण रायसेन कर दिया गया मगर नपुंसक प्रशासन की कमजोरी का फायदा उठाते हुए इस बी एम ओ ने न तो माखननगर छोड़ा है और न ही शासकीय आवास खाली किया है । इतना ही नहीं आप इस इस बेशर्म बी एम ओ की बेहयाई देखिए कि किस तरह वह निजी क्लीनिक चलाने के लिए अपने शासकीय आवास का धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रही है । कलेक्टर स्वयं यहां का निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन अफसोस कि वे भी इस पूर्व बी एम ओ के सामने असहाय नज़र आये । उन्होंने शासकीय आवास में खुलेआम संचालित किए जा रहे बी एम ओ के निजी क्लीनिक की तरफ आंख उठाकर तक नहीं देखा। बाद में पुनः शिकायत होने पर कलेक्टर ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भूतपूर्व बी एम ओ से शासकीय आवास खाली कराने हेतु तहसीलदार , बाबई को निर्देश दिए । इधर तहसीलदार में इतनी हिम्मत है नहीं कि वो उपरोक्त बी एमओ से शासकीय आवास खाली करवा सके । अब इन दोनों अधिकारियों के सामने सी एम एच ओ की क्या औकात है । वे एक के बाद एक तीन नोटिस दे चुके हैं मगर स्थानांतरित बी एम ओ की मोटी चमड़ी पर जरा भी असर नहीं हुआ । 25 वर्षों से जो औरत कुंडली मार के कुर्सी पर बैठी है उस के सामने कलेक्टर , तहसीलदार , सी एम एच ओ की क्या बिसात है । ऐसे कई अधिकारी आये और चले गए । ये तथाकथित अधिकारी, बी एम ओ से शासकीय आवास खाली कराने के लिए दो दिवस तो क्या दो वर्ष की भी समय सीमा निश्चित कर दें तो भी उक्त बी एम ओ से शासकीय आवास खाली नहीं करवा सकेंगे । मजे की बात तो ये है कि इस बी एम ओ ने स्वास्थ्य विभाग की योजना को भी चूना लगा दिया । दरअसल स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की योजना ये थी कि स्थानांतरित बी एम ओ के सरकारी आवास खाली किये जाने पर यहां कोरोना वार्ड बनाया जाए लेकिन पूर्व बी एम ओ ने विभाग की इस योजना पर पानी फेर दिया । रही बात तहसीलदार की तो उक्त तहसीलदार पहले भी माखननगर में रह चुका है । इसलिए ही बी एम ओ के खिलाफ कार्यवाही करने में वह आगे पीछे हो रहा है । जनचर्चा है कि स्थानांतरित बी एम ओ अधिकारियों पर ही अभद्रता के आरोप लगा देती है । यही वजह है कि प्रमुख सचिव से लेकर एक तहसीलदार तक को बी एम ओ से शासकीय आवास खाली कराने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है । माखननगर में चल रही इस नौटंकी में अब एक नए अधिकारी की एंट्री हुई है । जिला पंचायत के सी ई ओ मनोज सरयाम । देखना ये है कि वे इस बी एम ओ के खिलाफ कितनी हिम्मत दिखाते हैं । फिलहाल तो उन्होंने एक औपचारिक बयान देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है । इब्तिदा – ए – इश्क़ है रोता है क्या , आगे – आगे देखिए होता है क्या । आश्चर्य की बात तो ये है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ‘ एक भारतीय आत्मा ‘ राष्ट्र कवि माखनलाल चतुर्वेदी की जन्म भूमि से जुड़े सामाजिक संगठन चूड़ी पहन कर बैठे हैं । बधाई के पात्र तो नए बी एम ओ हैं जिन्होंने आते ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेदारियों को बखूबी सम्हाला है । अभी पिछले दिनों ही उन्होंने ग्रामीणों की मदद से एक गर्भवती महिला को ट्रैक्टर ट्राली से सुरक्षित तवा पुल पार कराया । वहां से जिला अस्पताल की गाड़ी जननी महिला को लेकर अस्पताल पहुंची । समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण महिला और उसकी लाड़ली लक्ष्मी दोनों स्वस्थ हैं । मुश्किल ये है कि ऐसे कर्तव्यनिष्ठ बी एम ओ को न तो राजनेता टिकने देंगे और न ही अधिकारी । रही बात हम लोगों की । आम आदमी की । तो भैय्या रहो राम भरोसे ।

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