काव्यभाषा : तमन्ना -अनिल साहू प्रतापपुर

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“तमन्ना”

अगर तुम चाँद बन जाओ,
तो मैं चकोर बन जाऊँ।
धरा तुम प्यास से तड़पो,
घटा-घनघोर बन जाऊँ।
तुम्हारा और हमारा प्रेम हो,
उन पाक अश्कों सा,
मोरनी बन पुकारो तुम,
सदा सुन मोर बन जाऊँ।।

अनिल साहू

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