काव्यभाषा : क्षमा -ऋतु राज वर्षा रांची

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क्षमा

हे प्रभु क्षमा करो मानव के कुकृत्य को।
निस्संदेह,दे रहे यह नित्य विपदाएं पूरे जगत को।

मालूम नहीं इन्हें क्या कर रहे, फिर कैसे संभालेंगे भीषण हालात को।
जघन्य अपराध नहीं होते कभी क्षमा, चाहे लाखों बार करें कोई याचना।

हे प्रभु क्षमा करो मानव की उदंडता को।
पनप रहा कोई शैतान उसका खात्मा जल्द करो भगवान।

क्या कम दुखी थे दुनिया में हम,कोरोना वायरस का भी मिल गया गम। क्यों फैला दुनिया में कोरोना का महामारी।

खौफ पैदा कर दिया जनता में, बेकाबू हो रहे लाकडाउन की लाचारी में।
हे प्रभु क्षमा करो मानव की दुष्टता को। कोशिशें जारी है,सबकुछ सामान्य बनाने की।

स्वच्छ करो प्रभु,मानव मन की मलिनता को।
हे प्रभु क्षमा करो मानव के कुकृत्य को।

ऋतु राज वर्षा
रांची

1 COMMENT

  1. बहुत धन्यवाद महोदय, मेरी रचना क्षमा को स्थान देने के लिए। हमेशा आपका ऐसे ही सहयोग बना रहे। आपके हम बहुत आभारी हैं। आपके मार्गदर्शन और निदेशन में मेरी रचनाएं निरंतर निखर रही है। मेरी नयी रचनाएं पुनः आपके समक्ष होगी। सधन्यवाद।

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