काव्यभाषा : बन्द व्यापार हो शिक्षा का -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

20

Email

बन्द व्यापार हो शिक्षा का

शिक्षा को क्यों बना दिया
लाभ का व्यापार
ज्ञान अर्जन कहाँ रहा
अब मूल आधार

जनता की जेबों में डाल रहे हैं हाथ
शिक्षा के अधिकार के ,नहीं हैं नेता साथ
रचा गया संविधान क्या इसी व्यापार हेतु
विकास ढूंढती सरकारें,कर्म कहाँ शिक्षा हेतु

जागें अब तो सब जन गण
दें विद्यालय, शिक्षा पर ध्यान
केवल प्रवेश करवाएं बच्चे
हों केवल सरकारी ही संस्थान

शिक्षक दे सकते सब शिक्षा
क्या हिन्दी, क्या अंग्रेजी
उनको,समुचित वेतन ,सुविधा
सरकारें जब दे देंगी

बन्द व्यापार हो शिक्षा का
आम जन भी जब बच्चे पढ़ा सकें
शुल्क,अल्प हो ,तभी देश सब
ब्रज ,अपनी मंजिलें पा सकें

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here