काव्यभाषा : गुरु की महिमा – कृष्ण कुमार ध्रुव,प्रेमनगर

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गुरु की महिमा

शिक्षक है अद्भुत कुम्हार,जिसने दिया समाज को नया आकार।
सदियों से तिमिर दूर करते आया, जग से दूर किया विकार। 

जीवन पथ पर अग्रसर होने, नित दिन देता सद्ज्ञान।
गुरु आशीष से मिले बुद्धि, भटके राही धर रहे ध्यान।

देवतुल्य मनु तन पाए, धरा के है ये भगवान।
ऊर्जा और संचार से है भरा, हिंद बन रहा ज्ञानवान।

बंजर में भी फूल खिलाता, निर्गुण में आ जाती है चेतना।
आत्मसात किया जिसने ज्ञान को, उससे दूर हो जाती है वेदना।

मन मस्तिष्क में समभाव भरते,मजहब जाति से दूर हटाते।
अंधकार से नाता तोड़, जीवन को प्रकाशवान है बनाते।

जब से कदमों में जान आयी, तब से अपने शरण है दिए।
शिक्षा की अलख जगाने तुमने, जीवंत संकल्प है लिए।

गुरु है ज्ञान का भण्डार, अद्वितीय है स्थान इनका।
उन्नत राष्ट्र के बागडोर सम्हाले,दुष्ट हिला न पाए तिनका।

गुरु की महिमा जो जाने, जग में ख्याति है वो पाता।
उत्तम कोटि स्थान मिले,भवसागर से वो तर जाता।

कृष्ण कुमार ध्रुव, व्याख्याता
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय- कोटेया, विकास खण्ड- प्रेमनगर, जिला- सूरजपुर(छत्तीसगढ़)

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