काव्यभाषा : पर्यटक हैं हम -डॉ ब्रजभूषण मिश्र भोपाल

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पर्यटक हैं हम

मन हल्का व हर्षित रखें हम
उड़ें गगन,बहें बन पवन
बोझ जिन्दगी न हो,हो यात्रा
जीवन मे एक पर्यटक हैं हम

सद्भाव,मैत्री,सहयोग रखें
प्रकृति व नियति को चखें
शिकायतें किससे है करना
अर्जित धन निर्धन पर खर्चें

प्रेम की शक्ति पहचानें
इसे ही भक्ति सब मानें
जीवन प्रसाद मिला हमें
ब्रज,आभार ईश का मानें

डॉ ब्रजभूषण मिश्र
भोपाल

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