काव्यभाष : पर्यावरण -रवि प्रभात श्रीवास्तव “मनीष”,हाजीपुर

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पर्यावरण

हरी भरी हो धरती अपनी,
हरा भरा हो जग संसार,
कूड़ा कचरा पॉलीथिन से,
फैलती प्रदूषण और रोग हज़ार,
दूषित गैस घूली जलवायु में,
हरित पर्यावरण को नष्ट है करती,
लाख रोगों से छुटकारा मिलती,
जब हरित पर्यावरण है मुस्काती,
जग में जीवन का मूलमंत्र बस,
स्वच्छ पर्यावरण ही बतलाती,
है जीवन गर अनमोल बनाना,
हर वर्ष नया है एक पेड़ लगाना,
कागज़ या कपड़ों के थैले बिन,
कभी नहीं बाजार है जाना,
कटे फसल के शेष अंश को,
खेतों में ना है कभी जलाना,
मोटर वाहन का सीमित उपयोग कर,
पैदल और साईकिल से है काया बनाना,
बस एक बात है सदा रखना याद,
हरित पर्यावरण है जीवन का आधार,

@ रवि प्रभात श्रीवास्तव “मनीष”
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक,
पूर्व मध्य रेल (मुख्यालय),
हाजीपुर।

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