लोक कला एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए उच्च शिक्षा एवं शोध के केंद्र खुले – कुलपति प्रो. अंजनी कुमार श्रीवास्तव

दो दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समागम का समापन

लोक कला एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए उच्च शिक्षा एवं शोध के केंद्र खुले – कुलपति प्रो. अंजनी कुमार श्रीवास्तव

धनबाद। नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी धनबाद, ह्यूमन एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट सोसाइटी वाराणसी एवं लोक सेवा आश्रम विष्णुपुर बांका, बिहार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समागम का समापन समकालीन भारतीय साहित्यिक पर विमर्श से हुआ I कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री मुकुंद नायक ने कि अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होनों समकालीन भारत में लुप्त होती लोक संस्कृति पर चिंता जताते हुए कहा कि लोक कला एवं संस्कृति के बिना साहित्य मृतप्राय एवं अर्थहीन है, युवा साहित्यकारों को लोक साहित्य के विषय पर शोध कार्य बढ़ाने की अपील की I मुख्य अतिथि बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने पद्मश्री मुकुंद नायक का स्वागत करते हुए कहा कि झारखण्ड की लोककला एवं संस्कृति को जिंदा रखने में आपके योगदानों से वर्तमान पीढ़ी तो प्रेरित हो ही रही है, आने वाली पीढियां भी प्रेरणा रूप में याद रखेगी उन्होंने कहा कि यध्यपि किसी भी विमर्श को हम सीमाओं में नहीं बांध सकते हैं I किंतु कोई भी विमर्श तभी सार्थक होगी जब उसमें मौजूदा चिंताओं एवं समस्याओं का उचित समाधान निकले, लोगों में जाग्रति आए, लोगों में सकारात्मक उर्जा एवं संवेदना का संचार हो I लोक कला एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में और झारखण्ड जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में अलग से विश्वविद्यालय व शोध केंद्र खुलना चाहिए I मुख्य वक्ता बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चौथीराम यादव ने कहा कि नारी – दलित – आदिवासी – प्रकृति मूलक विमर्श ही समकालीन भारतीय साहित्य के मूल विमर्श हैं। कबीर एवं मीरा को छोड़ कर समकालीन चिंताओं पर विमर्श बेईमानी होगी I नारी – दलित – आदिवासी – प्रकृति मूलक विमर्श को मुख्यधारा साहित्यकारों ने लंबे समय से उपेक्षित रखा है I आमंत्रित वक्ताओं में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रोफेसर एवं दलित चिन्तक प्रो. राजेश पासवान ने वर्तमान भारत में दलित साहित्य की अभिनव प्रवृतियाँ, जे.एन.यू.,दिल्ली के ही हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ राम चंद्रा ने समकालीन साहित्य में पर्यावरणीय चिंताए, बाबा भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ कालीचरण स्नेही ने भारत में दलित साहित्य : दशा एवं दिशा, बी.बी.ए.यू, लखनऊ के ही हिंदी विभाग के डॉ शशि शेखर ने मानवाधिकार विषयक विमर्श, नारीवादी चिन्तक एवं सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ अनीता भारती भारत में नारी अस्मिता विमर्श एवं पर्यावरण। साहित्य में काम कर रहे युवा शोधकर्ता डॉ अनिश कुमार ने समकालीन साहित्य में पर्यावरणीय विमर्श पर अपनी बात रखा I
कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ श्याम किशोर प्रसाद, विषय प्रवेश आर.एस.पी.कॉलेज, झरिया के हिंदी विभाग के प्रो. डॉ निलेश कुमार, कार्यक्रम की औचित्य संयोजक एवं आर.एस.पी. कॉलेज झरिया के प्रो.रामचंद्र कुमार, प्रतिवेदन प्रस्तुतीकरण बी.बी.एम्.के.यू, धनबाद के पी.जी. हिंदी विभाग के डॉ मुकुंद रविदास, धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के सहसंयोजक प्रो.एतवा टूटी ने किया I

प्रथम दिवस अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन

कार्यक्रम के संयुक्त आयोजन सचिव व नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक सचिव मिथलेश दास ने बताया की प्रथम दिवस अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमे देश-विदेश एवं झारखण्ड के क्षेत्रीय भाषा के लगभग 30 कवि एवं कवयित्रियों ने मानव जीवन के विविध आयाम पर कविताएँ प्रस्तुत किया I अध्यक्ष कर रहे पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने कार्यक्रम में कहा कि प्रकृति, प्रेम, भक्ति, सौन्दर्य, शौर्य, संस्कृति, पैसे की अमीरी तो दिल गरीबी पर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर कविताएँ कही गयी और इन वैवेधिक आयामों पर इस तरह के आयोजनों से आमजनमानस में समग्र चेतना विकसित होती है l उन्होंने ने इस मौके पर गांव नहीं छोड़ब अपने प्रसिद्ध गीत को गाया I मुख्य अतिथि सेवानिवृत आईएएस अधिकारी व प्रतिष्ठित कवि श्री हरिकांत त्रिपाठी ने कहा कि झारखण्ड साहित्य समाज का दर्पण है और किसी भी देश की दशा एवं दिशा तय करने में साहित्य की भूमिका पथ प्रदर्शक की रही है I कार्यक्रम के संयोजक डॉ श्याम किशोर प्रसाद ने स्वागत भाषण देते हुए झारखण्ड राज्य जिसके माटी के पुरखाओं ने सदियों से चली आ रही आदि परंपरा की रक्षा के लिए कुर्बान हो गए उनकी पुण्यात्माओं का नमन नही करना बेईमानी होगी I जबकि कार्यक्रम की समीक्षा भाषण देते हुए एन.आर.डी.एस. धनबाद के संस्थापक प्रो. रामचंद्र कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम में तिरंगा की शान, देशभक्ति, भारत की विविधता में एकता की संस्कृति, झारखण्ड की प्राकृतिक सौन्दर्य, झारखण्ड के पुरखों की प्रेरक स्मृतियाँ, सेना की शहादत, गरीबी, विरह वेदना, सत्ता का अहंकार, भ्रस्टाचार की समस्या, बेरोजगारी एवं मानव जीवन को नई उर्जा एवं प्रेरणा देने वाले विविध कविताओं का आभासी प्रस्तुतीकरण हुआ, कार्यक्रम का संचालन संयोजिका प्रियदर्शनी पुष्पा ने किया जबकि कार्यक्रम के निर्देशक आर.एस.पी.कॉलेज झरिया के प्रो. रितेश रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया I

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अमरनाथ पासवान (मार्गदर्शक), डॉ देवेन्द्र कुमार चौबे(मार्गदर्शक), डॉ निलेश कुमार(समन्वयक), डॉ मुकुंद रविदास(समन्वयक), प्रो. रितेश रंजन(निर्देशक), डॉ श्याम किशोर प्रसाद (संयोजक), प्रो.रामचंद्र कुमार(संयोजक), प्रो. इतवा टूटी(सहसंयोजक), प्रो अशोक कुमार चौबे(सहसंयोजक), पुष्पा प्रियदर्शनी(आयोजन सचिव), प्रियांजना याज्ञसेनी(सहआयोजन सचिव), कार्यक्रम संयुक्त आयोजन सचिव व नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक सचिव मिथलेश दास, सामाजिक कार्यकर्त्ता जितेन्द्र देवगम,अजय कुमार रवानी, संजय रवानी, सुमित घोषाल, राजन कुमार, डॉ शशि शेखर आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई I

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here