विविध : उत्तरप्रदेश में बढ़ती ब्राह्मणों की हत्याएं,कानूनी मसला या जातीय विद्वेष -नरेंद्र तिवारी’ एडवोकेट’,सेंधवा

उत्तरप्रदेश में बढ़ती ब्राह्मणों की हत्याएं,कानूनी मसला या जातीय विद्वेष

उत्तरप्रदेश की सियासत में ब्राह्मणों का प्रभाव आजादी के बाद से चला आ रहा है।सपा,बसपा ओर कांग्रेस की जातीय राजनीति के परिणामस्वरूप ब्राह्मणों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ता चला गया गया,यही कारण रहा कि यूपी में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 15 ब्राह्मणों को टिकट दिया जिसमें से 13 लोकसभा पहुचे।इन सबके बावजूद यंहा ब्राह्मणों की हत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय है। यह हत्याएं कानूनी मसला है या जातीय विद्वेष यह जानना बहुत जरूरी है?लोकतंत्र में जातीय विद्वेष का कोई स्थान नही है,किसी भी वर्ग की हत्या सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।यही कारण है कि ब्राह्मणों की हत्या के मामले में यूपी की योगी सरकार के खिलाफ कांग्रेस,सपा,बसपा सभी आन्दोलन कि मुद्रा में दिखाई दे रहे है।
ब्राह्मणों की बढ़ती हत्याओं से एक ओर यूपी के तमाम ब्राह्मण संगठन सरकार से नाराज दिखाई दे रहे है,वही सुल्तानपुर के भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने अपनी ही सरकार से आगामी विधानसभा सत्र के लिए एक ही सवाल किया है कि पिछले 3 साल में योगी सरकार के कार्यकाल में कितने ब्राह्मणों की हत्या हुई और कितने हत्यारे पकड़े गए।भाजपा के ही विधायक द्वारा दागे इस सवाल से यूपी में ब्राह्मणों की बढ़ती हत्याओं पर नए सिरे से बहस शुरू हो गयी है, इस विषय पर ब्राह्मणों के संगठनों द्वारा सोशल मीडिया पर तो मुहिम चला ही रखी है,ब्राह्मणों के उक्त संगठन योगी सरकार की खिलाफत भी करने लगे है,यूपी के राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में ब्राह्मणों का वर्चस्व हमेशा माना जाता रहा है तो क्या 2017 में योगी सरकार के आने के बाद ब्राह्मणों के विरुद्ध हत्याएं ओर हिंसा के मामले बढ़ गए है?
यूपी में ब्राह्मणों की हत्या के बढ़ते मामले न सिर्फ चौकाने वाले है अपितू राज्य सरकार की लचर ओर कमजोर कानून व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा करते है। यूपी में 18 अक्टूम्बर को हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या,27 सितम्बर 2018 को एप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या,14 अक्टूम्बर को झांसी के सीपरी इलाके में जगदीश उदैनिया उनकी मां कुमुद,पत्नी रजनी,व बेटी मुस्कान को सोते समय जिंदा जलाने की लोमहर्षक घटना,26 जून 2017 को रायबरेली के अप्टागांव में 5 ब्राह्मणों की हत्या, 9अक्टूम्बर को बस्ती में पीजी कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आदित्य नारायण तिवारी की गोली मारकर की गई हत्या,मेंनपुरी में 16 सितम्बर 2019 को नवोदय विधालय की छात्रा के संदिग्ध आत्महत्या की घटना, इस जैसी अनेको घटनाओं के कारण उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ब्राह्मणों की आलोचना का पात्र बन गयी है।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ के अध्यक्ष असीम पांडे कहते है पिछली सरकारों में भी ब्राह्मणों के साथ हिसा हुई है, लेकिन इस सरकार में ऐसे मामले अधिक बढ़ गए है असीम के मुताबिक जून जुलाई के पिछले11महीनों में 23 ब्राह्मणों की हत्या हुई है।
यूपी में बढ़ती इन घटनाओं से समाज का प्रभावी वर्ग आक्रोश में दिखाई दे रहा है, तमाम राजनैतिक दल इस आक्रोश को अपने पक्ष में भुना रहे है।कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी इस विषय मे अव्वल है यूपी कांग्रेस के नेता जितिन प्रसाद ने ब्राह्मण चेतना यात्रा निकालकर सोशल मीडिया के माध्यम से केम्पेन चला रखा है।इस विषय बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने भी इन घटनाओ में सरकार के खिलाफ टिप्पणियां की समाजवादी भी ब्राह्मणों की हत्या के मामलो को उठा रहे है, बसपा ओर समाजवादी में तो भगवान परशुराम की विशाल प्रतिमा लगाने की प्रतिस्पर्धा तक चलने लगी है।
ब्राह्मणों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ओर बढ़ते अपराध यूपी सरकार की सेहत के लिए ठीक नही है,ब्राह्मण सदैव राष्ट्र और राज्य के समर्पित रहे है,समाज मे आदिकाल से शासक वर्ग ब्राह्मणों का सम्मान करता रहा है।
सियासत में किसी भी प्रकार की हिंसा या अपराध का कोई स्थान नही है।सरकार ने अपने खिलाफ बन रहे इस माहौल को तुरतं रोकने के प्रयास करने चाहिए। इन मामलों की जांच गम्भीरता से किये जाने की आवश्यकता है ।आगे ब्राह्मणों के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने की भी आवश्यकता है। राजनैतिक दलों को यह ध्यान रखना चाहिए मध्यप्रदेश में 2018 के विधान सभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की एक टिप्पणी ने सपाक्स संघठन का गठन कर दिया था। इस टिप्पणी ने भाजपा को सरकार से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।वैसे भी उत्तरप्रदेश में अपराधों पर रोक लगाने में सरकार पूरी तरह विफल दिखाई दे रही है।ब्राह्मणों के खिलाफ जारी हिंसा तो यही कहानी बयां कर रही है। समय रहते यूपी सरकार को हिंसा ओर अपराध से मुक्त किये जाने का प्रयास करना चाहिए,वरना ये आक्रोश बड़ा स्वरूप ग्रहण कर लेगा,सरकारों को सभी वर्गों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राज्य में सभी वर्गों के लिए सुरक्षित माहौल निर्मित किये जाने के प्रयास निरन्तर करते रहने चाहिए, वही जातीय ओर धार्मिक सियासत राज्य की सेहत के लिए ठीक नही है सपा,बसपा ओर कांग्रेस जातीय ओर धार्मिक राजनीति का परिणाम भोग चुकी है।योगी आदित्य नाथ की सरकार को इन हिंसक घटनाओं को तत्काल नियंत्रित कर राज्य में ब्राह्मणों के विश्वास को बहाल करना चाहिए।
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नरेंद्र तिवारी’ एडवोकेट’
7,शंकरगली मोतीबाग
सेंधवा जिला बड़वानी मप्र
मोबा-9425089251

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