काव्यभाषा : कलयुग में राम -रश्मि द्विवेदी ग्वालियर

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कलयुग में राम

किसी अनजान की परेशानी देख
जब दिल घबरा जाए,
बेवजाह किसी के चेहरे की मुस्कान देख
खुद के चेहरे पर मुस्कान आए
तो समझो कलयुग में राम नजर आए

किसी की पीड़ा,
जब मन में घर कर जाए
किसी की सफलता,
जब गर्व का कारण दे जाए
तो समझो कलयुग में राम नजर आए

किसी को भूखा देख,
जब खुद की भूख मिट जाए
किसी गैर के आंसू देख
जब खुद के छलक आए
गैर और अपने का एहसास मिट जाए
तो समझो कलयुग में राम नजर आए

किसी की चालाकी भी हंसकर टाल जाए
उसकी चाल पर भी मौन रह जाएं
सबमें उस सत्ता का ही अंश है
ये समझ जाए
तो समझो कलयुग में राम नजर आए।

रश्मि द्विवेदी ग्वालियर

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