काव्यभाषा : चाटुकारिता -प्रो आर एन सिंह, वाराणसी

Email

चाटुकारिता

चाटुकारिता संग हो जब पावर का हाथ,
नये दौर का मंत्र है रखिए हरदम साथ।

मेहनत,निष्ठा, सरलता बीते दिन की बात,
तुरत सफलता पाइए,चारण बन दिन रात।

रीति नीति आदर्श सबआज लगे हैं व्यर्थ,
बस दरबारी राग ही,देता सुंदर अर्थ।

जो मतलब के मीत हैं, उनसे रहिए दूर
पास रखो तो सालते पीड़ा दें भरपूर।

अजय गजब यह दौर है, कौओं का सम्मान,
पिक हो रही उपेक्षिता, पाती बस अपमान।

झूठों की जयगान है, सच दिख रहा मलीन,
मकर सुशोभित हर तरफ, डरी डरी है मीन।

‘साहिल’
प्रो आर एन सिंह,
मनोविज्ञान, बी एच यू.,
वाराणसी

2 COMMENTS

  1. Nice Poetry , indicating the real life , situation and the true aspect of a Friend .A true friend is one , who is always without any self interest .In otherwords, A friend in need is a Friend indeed . In real sense it is a poetry signifying the trait of frendship , in this present time

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here