कहानी : दहेज -अर्पणा दुबे अनूपपुर मध्यप्रदेश

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कहानी
दहेज

सुमित्रा देवी की एक बेटी थी जिसको वह बहुत ही प्यार करती थी वह अपनी बेटी को प्यार से तनु कहती थी सुमित्रा देवी का सपना था की मेरी बेटी डॉक्टर बने उसी बीच तनु के पापा और माँ तीनो घूमने गए बाजार में तनु अपने माँ पिता जी से ज़िद कर रही थी कि मुझे यह कपड़ा लेना है । उसी वक्त एक लड़का तनु को देखा और उसे पसन्द कर लिया फिर वह घर जाकर अपने माता पिता से बोलने लगा कि माँ तू बोलती थी की तू शादी करले तो उसकी माँ बोली हा बेटा क्यों तुझे लड़की पसन्द आई है । लड़के नाम राज था राज अपनी माँ से बोला हा माँ मैने एक लड़की देखी है जो बहुत ही सुंदर है उसकी माँ बोली की कहाँ की है। राज बोला मुझे नही पता औऱ फिर उसी दुकान में दौड़ा दौड़ा गया और उस दुकान वाले से पूछा कि अंकल वह जो लड़की कपड़ा लेने के लिए ज़िद कर रही थी वह लड़की कहाँ की है तो दुकान दार बोला की वो तो मास्टर जी की बेटी है । तुम क्यों पूछ रहे हो – तो राज बोला – ऐसे ही आप उनका परिचय दे दीजिए।
दुकानदार बोला कि वो आपके लिए सही नही है वो लड़की कहाँ और आप लोग कहाँ। लड़का बहुत पढ़ा लिखा था। उसकी पूरी पढ़ाई बाहर से हुई थी लड़के के पिता जी बहुत पैसे वाले थे । उस दुकान दार ने उस लड़के से बोला कि उन लोग यहां पास के गांव के है और बोला वो में तुमको उनके घर ले चलूं । तभी राज बोला -नही मैं बाद में जाऊगा । आप उनका परिचय दे दीजिये, फिर वह घर गया और घर जाकर अपने माँ से बताया कि माँ उनका परिचय मिल गया है और तुम पिता जी से बता देना। माँ पूछी की बेटा उस लड़की के पिता जी क्या करते है । राज ने कहा उसके पिता मास्टर है । उनका घर उस दुकान के पास बाले गांव में है । राज की माँ ने सब बात उसके पिता से कह दी कि राज उस लड़की से शादी करना चाहता है। लड़के के पिता ने इनकार कर दिया की हम उस गांव की लड़की से शादी नही करेंगे क्योंकि हमारा बेटा बहुत पढ़ा लिखा है । तभी माँ ने राज से कहा कि तुम्हारे पिता ने साफ इंकार कर दिए है। राज जिद में अड़ गया कि मै उसी लडक़ी से शादी करुगा वरना मैं शादी ही नही करुगा। अपने कमरे में निराश हो कर राज बैठ गया फिर उसकी माँ राज के पिता से कहा कि राज ने खाना नही खाया है और अपने कमरे में निराश हो कर बैठ गया है। कहता है मै उसी लड़की से शादी करूंगा तो उसके पिता जी ने यह सब बाते सुन कर शादी के लिए हां कर दिया ।वह अगले दिन मास्टर जी के घर अपने लड़के का रिश्ता लेकर पहुच गए ।मास्टर जी के यहाँ जाकर उनकी बेटी का हाथ मांगा फिर मास्टर जी इतने बड़े आदमी का रिश्ता सुनकर आश्चर्य चकित हो गए और बोले कि मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि मेरी बेटी आपके घर बहु बनकर जाएगी। मास्टर जी ने अपनी बेटी को चाय रखा कर बाहर भेजा और लड़के की माँ लड़की को देख कर बहुत खुश हुई और बोली – हमे रिश्ता मंजूर हैं और आप लोग शादी की तैयारी किजीये । लड़की के पिता बहुत खुश। हुए और तनु को देख कर सहलाते हुए शादी की तैयारी करने चले गए तभी तनु मन
ही सोची की मेरी माँ का सपना था कि में डॉक्टर बनूँ और फिर तनु ने अपनी माँ से कहा कि माँ में एक बार उस लड़के से मिलना चाहती हूं। तभी तनु की माँ ने उसके पिता से कहा कि तनु एक बार उस लड़के से मिलना चाहती है ।पिता जी ने उस लड़के को बुलवाया ।लड़का अपने पिता के साथ आया। लड़के के पिता जी ने लड़की के पिता जी से कहा कि आप से मुझे जरूरी बात करनी है। राज के पिता जी ने तनु के पिता से कहा कि आप मुझे दहेज में 3 लाख रूपये दीजिये। इधर तनु और राज दोनो बात कर रहे थे तनु राज से आपने माँ के सपने के बारे मे बताई । राज बोला में सब सपने पूरे करुगा। तनु बहुत खुश हुई और माँ से जाकर बोली कि माँ मुझे राज पसंद हैं। राज और उसके पिता जी घर चले गए । उनके घर जाने के बाद तनु के पिता जी सोच में पड़ गए कि मैं 3 लाख रुपये कहां से लाऊ लेकिन तनु की खुशी को देखकर वह हां बोल दिए कि में आपको 3 लाख रुपये दे देगें फिर शादी की तैयारी में सब जुट गए और बड़े खुशी के साथ शादी की तैयारी करने लगे । राज भी बहुत खुश था बारात लेकर आये सब लोग राज भी बहुत खुशी से तैयार हुआ और आगया मंडप के नीचे जब तनु आयी तो राज उसे देखकर बहुत खुश हुआ उस वक़्त राज के पिता जी ने बोला कि यही शादी रोक दो। राज देखते ही रह गया और बोला पिता जी आप को क्या हो गया हैं तभी वह तनु के पिता जी से बोले कि हमको एक कार चाहिए तभी आपकी बेटी से मेरा बेटा शादी करेगा वरना नही। उसके पिता जी बहुत ही दुःखी हो गए लेकिन आपनी बेटी तनु को देख कर उन्होने फिर बोला कि में दे दूँगा और अपना घर गिरवी रख दिया और शादी धूमधाम से हुई और विवाह करवा कर बेटी को विदा किया जैसे ही बेटी ससुराल पहुंची तो अपन चप्पल उसी गाडी में छोड दिया और खाली पैर चली आई । सब लोग पूछे कि तुम्हारा चप्पल कहाँ है । लड़की अपने पति से बोली कि जाओ मेरा चप्पल लेकर आओ।
सब लोग देखते ही रह गए और बोले कि कैसी बहु है लेकिन राज को शर्म नही आई और वह चप्पल लाकर दिया और तनु ने सबके सामने जवाब दिया कि मेरे ससुराल वाले तिलक लिए है तो मैंने उनके बेटे को खरीद लिया है। फिर 2 दिन बाद लड़की मायके गयी और उसके पिता जी एक झोपड़ी में रह रहे थे लड़की देखते ही रह गई और राज से कहा कि तुम जाओ मैनही जाऊँगी आपके घर तो राज बोला मै भी नही जाऊँगा और तनु के पिता जी का घर वापिस दिलवा दिया और वह भी रहने लगा। राज के माता पिता जब राज को लेने आये तो उसने जवाब दिया कि में भीख मांगने वालों के घर नही जाऊँगा और जिस घर मे मेरी पत्नी की इज्ज़त नही हैं उस घर मे मेरी कोई इज्जत नही हैं ।

अर्पणा दुबे
अनूपपुर मध्यप्रदेश

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