काव्यभाषा : बाइस्कोप देखिए -डॉ.अखिलेश्वर तिवारी पटना

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बाइस्कोप देखिए

अनपढ़ जब ज्ञान बाँटने लगे उस समाज को देखिए।
हाँ में हाँ भरनेवाले पढ़े लिखे मरे हुए लाशों को देखिए।

स्वार्थ में सराबोर सियासी सलाहकारों को देखिए।
कभी चुनाव नहीं जीतने वाले नेताओं को देखिए।

साजिश पर साजिश कर हरे छद्म साहित्यकारों को देखिए।
सबके पैसे पर जीनेवाले बेईमान अदाकारों को देखिए।

आत्मा को पहले हीं बेंच चुके चाटुकार बेईमानों को देखिए।
एक ही साथ ज्ञान पाये हुए पुरस्कार लौटानेवालों को देखिए।

बिना जमीर समाजबादी समाजसेवी लुटेरों को देखिए।
एक हीं समस्या पर अलग बोलनेवाले पत्रकारों को देखिए।

स्वार्थ सेजुड़े हुए समस्याओं पर रोनेवाले भेड़ियों को देखिए।
जलते मुर्दे की लाश पर रोटियाँ सेंकते हुए गिद्धों को देखिए।

संस्कृति को छिन्न भिन्न करनेवाले इतिहासकारों को देखिए।
एक हीं साथ खरीदे हुए सम्मानों को लोटानेवालों को देखिए।

अलग पटल पर हुँआ हुँआ करनेवाले सियारों को देखिए।
सोचिए,समझिए,परखिये साथ आइए सशक्त भारत देखिए।

बिना कर दिए हुए पाँच साल में करोड़ोंपति बने हुए देखिए।
कानून इनलोगों का बिगाड़ नहीं सकता ऐसा कानून देखिए।

डॉ.अखिलेश्वर तिवारी
पटना

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