समीक्षा:देश प्रेम और सामाजिक स्थितियों को आलोकित करती है-‘भाव स्रोतस्विनी’- अनिमा दास,कटक,ओडिशा

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देश प्रेम और सामाजिक स्थितियों को आलोकित करती है-‘भाव स्रोतस्विनी’

अक्षरों को कल्पनाओं में भिगो कर
शब्दों से संवार कर
भावों की शीतलता, नरमी दी
दिया एक प्रवाह
अर्णव की दिशा में बहती
उस धारा में थी
अधीरता , स्वप्न थे
थी आत्मीयता
और अंतर्वेदना में थी
एक असमाप्त कविता
एक अभिसारीणी
अविरल बहती स्रोतस्विनी ।

ये समीक्षा लिखते हुए मुझे प्रसन्नता अनुभव हो रही है कि मैं उस कवि और उनकी कृतियों के बारे में लिख रही हूँ जो एक परम विद्वान साहित्यकार होने के साथ साथ श्रेष्ठ मानवीयता का भी अधिकारी है । हाल ही में श्री सत्यम प्रकाशन से श्रीमान ऋषि अग्रवाल जी के सौजन्य से प्रकाशित #भाव_स्रोतस्विनी* के बारे में ही लिख रही हूँ । जिसके रचयिता है आदरणीय श्री विनीत मोहन औदीच्य जी । जिनकी प्रथम पुस्तक *काव्य प्रवाह* में लिखी लगभग अधिकांश कविताएँ देश प्रेम सहित अन्य सामाजिक स्थितियों को आलोकित करती है । आइए जानते हैं आपकी लिखी द्वितीय हिंदी कविताओं की पुस्तक #भाव _स्रोतस्विनी* के बारे में ।
कई वर्षो पहले अधिकतर दिवंगत कवियों की लेखनी देश भक्ति के प्रवाह में चलती थी । परंपरा गत कविताओं का भी भरपूर मात्रा में आस्वादन किया गया । जो कविताएँ जन, समाज की अपनी संस्कृति , प्रेम और शांति का संदेशवाहक बनी और असामाजिक रोगों का उपचार भी बनी , ऐसी कविताएँ सकारात्मक आंदोलन की सृष्टि करती हैं । ठीक इसी तरह इस काव्य संग्रह में ” विश्वास * कविता का मर्म यही कहता है कैसे अविश्वास की रेखाएँ खींची गई है हमारे मन मस्तिष्क पर और कैसे हमारे कोमल मन पर इसका प्रभाव पड़ता है जो समाज और देश के लिए अनुचित है ।
प्रकृति का सौंदर्य कविताओं के भावों में भींग कर जब पुस्तक के एक एक पृष्ठ पर लिपिबद्ध हो जाता हैं …तो वास्तव में कविमन के अर्थपूर्ण विचार हृदयंगम होते हैं साथ ही नारी अधिकार और सम्मान पर लिखी कविताएँ संवेदनशीलता जागृत करती हैं ।
भाव स्रौतस्विनी में कई विधाएँ समाविष्ट हैं । परंतु , मैं चर्चा करूँगी अंग्रेजी विधा सोनेट के बारे में । कवि हिंदी साहित्यकार होने के साथ साथ अंग्रजी साहित्य के प्राध्यापक भी हैं । अतः आप सोनेट विधा में भी पारंगत हैं । आपके कई सोनेट इस पुस्तक में पृष्ठबद्ध हैं । इस विधा का स्वाभाविक प्सौंदर्य है इसकी नमनीयता या लालित्य जो कि आपके सोनेट्स में निहित है ।

सोनेट *प्रणय तरु की वल्लरी * में बहुत ही सौंदर्यपूर्ण और सिक्त मन की भाषा है ।
इस सोनेटसे उद्धृत दो पंक्तियाँ देखें ,

“सुर विरह का आर्त सा तुम, मैं प्रणय के गीत गाता
तप्त अधरों पर तुम्हारे,पुष्प मनसिज के खिलाता । ”

प्रेमपथ पर प्रतीक्षारत हृदय से जो शब्द और भाव स्रोत बह गये उन्होंने सोनेट का रूप लेकर स्रोतस्विनी में विलीन हो कर इसकी मधुरता बढ़ा दी है । शीर्षक सोनेट ..#भाव_स्रोतस्विनी को पढ़ते हुए यह अनुभूत होता है कि जैसे कवि हृदय को उथलपुथल करती भिन्न भिन्न भावनाएँ कैसे कविताओं के रूप लिये उतर गयीं होंगीं इस सोनेट में । जैसे ,

“शब्द हुये हैं मौन, मुखर लख, चंचल नैनों की भाषा
होठों का स्पंदन कहता नवल प्रीति की परिभाषा ।”

कैसे मन ने कही होगी युद्धरत स्वार्थ और क्रूरता की कहानी , विभीषिका के प्रचंड अट्टहास की कथा ….*युद्ध* सोनेट में कवि ने अपनी मन के उद्वेग को कुछ इस प्रकार मुखरित किया है ।

“युद्ध की विभीषिका में जल रहा जहान है
फूँकता है जो बिगुल , बन रहा महान है । ”

चौदह पंक्तियों में समाहित जीवन धारा कैसे काव्यरूप लेती है आपने बड़े ही मृदुलता से शब्दों को भावों में सजाया है । ऐसे कई और सोनेट्स हैं जैसे *जीवन सार * , *अहं * आदि जो की नैतिकता के मूल्यों को दर्शाते हैं ,
अहंकार पर करारा व्यंग्य करती हुई ये पंक्तियाँ देखिए

“अहं का बीज जब सोया हुआ , उगने लगे उर में
तो कोकिल कंठ भी गाने लगे , फिर काक के सुर में ।”

*एकात्म * सोनेट में प्रेम और समर्पण के भाव पाठकों के हृदय को निश्चित रूप से गहराई से स्पर्श करेंगे ।
दो पंक्तियाँ #एकात्म से उद्धृत ,

“मैं पथिक चलता निरंतर तुम अबूझी राह हो
प्रेम मंदिर का मैं पुजारी , तुम अवर्णित चाह हो ।”

मैं अतिशय आह्लादित हूँ। हिंदी साहित्य जगत को इस संग्रह के माध्यम से #सोनेट *विधा का परिचय कराने हेतु कवि को अनेकों बधाइयाँ । अति शीघ्र ही आपकी एक और एकल सोनेट पुस्तक प्रस्तावित है, इसके लिए अनेक शुभकामनाएं । आपने जो छांदस रचनाएँ सृष्ट की है वास्तव में प्रशंसनीय है ।
यह पुस्तक , जापानी विधाओं, छंदों, मुक्त रचनाओं के साथ साथ कई सोनेट से श्रृंगार करती जब मेरे हाथों में आई तो मैं कृतकृत्य हो गई । सानंद मैंनें रचनाओं को पढ़ कर हर पीढ़ी का स्मरण किया क्यूँकि ये काव्य संग्रह हर पीढ़ी के लिए सहज सरल और सुंदर उपहार है ।
इस संग्रहणीय काव्य संग्रह को प्राप्त करने के लिए नीचे अमेजन की लिंक दी जा रही है

मेरी यही मनोकामना है कि #भाव _स्रोतस्विनी* को उपयुक्त पाठकीयता व स्वीकार्यता मिले ।
कवि श्री विनीत मोहन जी की लेखनी को कोटिशः प्रणाम करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करती हूँ ।

अनिमा दास
हिंदी साहित्यकार
कटक,ओडिशा

2 COMMENTS

  1. मेरे एकल काव्य संग्रह *भाव स्रोतस्विनी* की अत्यंत सुंदर समीक्षा के लिए आदरणीया अनिमा दास जी एवं प्रकाशन हेतु युवा प्रवर्तक संरक्षक आदरणीय देवेंद्र सोनी साहब के प्रति हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ।
    स्नेह व सानिध्य बनाये रखें।
    आदर एवं आभार सहित
    💐💐🙏🙏💐💐

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