विविध : स्वप्न बनती नजर आ रही है शिक्षा -विवेक हर्ष ,गोरखपुर

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स्वप्न बनती नजर आ रही है शिक्षा

वर्तमान में अच्छी शिक्षा स्वप्न बनती नजर आ रही है। आज के महंगाई के दौर में शिक्षा भी बिक रही है । अब सरकारें बची खुची शिक्षण संस्थानों को भी बेचने लगीं ।लगता है वास्तव में शिक्षा सपना बन कर ही रह जायेगी। शिक्षा के निजीकरण से शिक्षा और भी महंगी होगी।
शिक्षा में असमानता सदैव बनतीं जायेगी जिससे समाजिक और आर्थिक असमानता की खाईयाँ सदैव बढ़ती जायेंगी । भला इतनी महंगी शिक्षा कैसे खरिद पायेगा एक गरीब और मजदूर।
यदि शिक्षा में इसी तरह असमानता बढ़ती जायेगी तो संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत् शिक्षा सभी के लिए शिक्षा 2030 के लक्ष्यों को कैसे प्राप्त कर पायेगा भारत ।
वैश्विक संदर्भ में देखें तो जहाँ दुनिया के बहुत सारे देश जैसे जपना, चीन आदि देशों ने मानव संसाधन विकास जैसे ,शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वभौम बना कर अपने यहाँ प्राकृतिक संसाधन न रहते हुए भी आज बड़े उत्पादक और निर्यातक बन गए हैं। अपनी आय को बहुत कम समय में बड़ा आकर दे चुके हैं ।
अगर हम वही शिक्षा पर खर्च देखें तो चीन ने वर्ष 2019 में 29 लाख 58 हजार करोड़ रुपये खर्च किया जो की भारत के वर्ष 2019 के बजट से अधिक है ।
वर्ष 2019 में भारत का बजट 27 लाख 86 हजार 349 करोड़ था ।
यदि शिक्षित, प्रशिक्षित और कौशल पूर्ण कार्यशिल , मजदूर होगें तो उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर होगी जिस से देश की आय में साकारात्मक परिवर्तन होगा । ऐसे में अगर हमारी सरकार शिक्षा का निजीकरण करती है तो हमारे देश में एक बड़ी आबादी गरीब,निर्धन और मजदूर है जो
सरकारी शिक्षण संस्थानों पर निर्भर है,उनके पास उतनी आय नहीं है कि वो महंगी निजी शिक्षण संस्थानों की फीस भर सकें।
सयुंक्त राष्ट्र संघ के वर्ष 2015-16 के आकड़ों के अनुसार भारत में 36.9 करोड़ यानी 27.9 प्रतिशत लोग गरीब है, जो शिक्षा से बंचित रह जायेगें और शिक्षा के सपनें उनके सपनें ही बन कर रह जायेगें ।

विवेक हर्ष
पता, ग्राम + पोस्ट राजधानी
जिला, गोरखपुर
राज्य, उत्तर प्रदेश

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