काव्यभाषा : दोहों में प्रभु गजानन्द-डॉ.मंजु गुप्ता  वाशी , नवी मुंबई

दोहों में प्रभु गजानन्द

भाद्रपद सदा आप से ! , हो जाता है दिव्य ।
गाँव , शहर , घर में सजे , गणेश मूरति भव्य ।।

करो कृपा इस बार प्रभु  , चरण धूलि दो  द्वार ।
ऋद्धि -सिद्धि शुभ लाभ कुल , संग बसे परिवार ।।

शुक्ल चौथ पर हैं सजे , प्रभु गणेश – दरबार ।
वर्ण भेद, बिन नस्ल के , समता लगे   कतार ।।

मंदिर में उमड़ता , भक्तों का सैलाब ।
कृपा दृष्टि से आपकी , पूर्ण होय सब ख्वाब ।।

माँ – पिता – जग सेवा का , देय पर्व सन्देश ।
विराजो हर –  घट  मन में , हर जन बने गणेश ।।

डॉ.मंजु गुप्ता 
वाशी , नवी मुंबई

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