काव्यभाषा : दुनिया के रखवाले -सुषमा दीक्षित शुक्ला लखनऊ

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दुनिया के रखवाले

दुनिया के रखवाले तुझ पर,
अर्पण मेरा तन मन धन ।

तू दाता है परमपिता है ,
तू ही जीवन और मरन ।

नजरें कभी न फेरो हे! प्रभु ,
इतनी सी फरियाद मेरी ।

भूल चूक सब क्षमा करो प्रभु,
दुनिया हो आबाद तेरी ।

सारी दुनिया रूठ भी जाये,
तुम ना रूठो परमपिता ।

सारी दुनिया अगर त्याग दे ,
नही त्यागते मात पिता ।

तेरा धन है तेरा मन है,
तेरा ही ये तन मेरा ।

तेरा सबकुछ तुम्हें समर्पित ,
क्या लागे इसमें मेरा ।

© सुषमा दीक्षित शुक्ला
लखनऊ

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